रायपुर: नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद अब छत्तीसगढ़ की समूची पुलिस और न्यायिक व्यवस्था को डिजिटल ट्रैक पर लाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। राज्य के सभी पुलिस थानों से एफआईआर से लेकर चार्जशीट तक सीधे अदालत पहुंचाने की प्रक्रिया को फुल-प्रूफ डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। पुलिस मुख्यालय में नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी थानों को नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) और ई-साक्ष्य के इस्तेमाल के लिए पूरी तरह तकनीकी रूप से लैस किया जाए।
ई-समन और ऑनलाइन चार्जशीट पर रहेगा मुख्य फोकस
जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए ई-समन जारी करने और उसकी समय पर तामील सुनिश्चित की जाएगी। तय सीमा के भीतर ऑनलाइन चार्जशीट कोर्ट में पेश करने की पुख्ता व्यवस्था तैयार की जा रही है। बैठक के दौरान गृह मंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के नेशनल क्रिमिनल लॉ इम्प्लीमेंटेशन (एनसीएलआई) डैशबोर्ड के प्रत्येक मापदंड की समीक्षा की। जुलाई से छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय रैंकिंग में आए सुधार पर संतोष जताते हुए उन्होंने मैदानी अधिकारियों-कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने पर बल दिया। इस बैठक में एनसीआरबी महानिदेशक अमित गर्ग, बीपीआरडी महानिदेशक आलोक मित्तल, प्रमुख सचिव गृह निहारिका बारिक और पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
क्या है एनसीएलआई डैशबोर्ड
नेशनल क्रिमिनल लॉ इम्प्लीमेंटेशन (एनसीएलआई) डैशबोर्ड केंद्रीय गृह मंत्रालय का प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसके माध्यम से देशभर में लागू तीन नए कानूनों—भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम—के क्रियान्वयन की प्रगति की रियल-टाइम निगरानी की जाती है। पुलिस विवेचना से लेकर न्यायालयीन प्रक्रिया में लगने वाले समय को घटाने के लिए ई-साक्ष्य, डिजिटल साक्ष्य और फिंगरप्रिंट पहचान को सीधे केस डायरी का हिस्सा बनाया जा रहा है।























