छोड़कर सामग्री पर जाएँ

छत्तीसगढ़ में ठोस कचरा प्रबंधन पर सख्ती: कलेक्टरों को 7 दिन की मोहलत, 4 माह बाद भी नहीं मिली ऑडिट रिपोर्ट

769415 solid waste management

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने ठोस कचरा प्रबंधन की बिगड़ी व्यवस्था पर सख्त रुख अख्तियार किया है। चार माह बीत जाने के बाद भी जिला कलेक्टरों द्वारा निरीक्षण और ऑडिट रिपोर्ट जमा न करने से खफा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने अब सभी जिलों को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणी बोरा ने इस संबंध में पत्र जारी करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्देशों के पालन में किसी भी तरह की शिथिलता, विलंब अथवा कमी को राज्य शासन गंभीरता से लेगा।

कलेक्टरों पर अहम जिम्मेदारी और नए नियम

प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था की हकीकत सामने लाने के लिए जिलों से लगातार निरीक्षण और ऑडिट रिपोर्ट मांगी जा रही थी। विभाग की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक, सभी नगरीय निकायों को 1 अप्रैल, 2026 से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करना था। इन नए प्रावधानों के तहत ही कचरे का स्रोत स्तर पर चार श्रेणियों – गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले अपशिष्ट – में पृथक्करण अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही, होटलों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, बड़ी आवासीय कॉलोनियों और अन्य बड़े कचरा उत्पादकों को अपने परिसरों में ही गीले कचरे के निपटान के लिए कंपोस्टिंग या बायोगैस जैसी व्यवस्थाएं विकसित करनी होंगी। इन नियमों की निगरानी और क्रियान्वयन का जिम्मा पहली बार जिला कलेक्टरों को सौंपा गया है, जिससे उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।

रिपोर्ट में देनी होंगी ये महत्वपूर्ण जानकारियां

प्रमुख सचिव द्वारा जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए निकायों में उपलब्ध सुविधाओं में मौजूद कमियों (गैप) का अनिवार्य रूप से चिन्हांकन किया जाए। साथ ही, इन कमियों के निराकरण के लिए राज्य शासन से अपेक्षित सहयोग और कार्रवाई का भी उल्लेख रिपोर्ट में करना होगा। कलेक्टरों को 30 अप्रैल, 2026 को जारी पत्र के माध्यम से अपने-अपने जिलों के निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं के निरीक्षण व ऑडिट के निर्देश दिए गए थे और प्रारंभिक अनुपालन के लिए कार्ययोजना भी मांगी गई थी।

लेकिन, निर्देश जारी होने के चार माह बाद भी विभाग को रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। मांगी गई रिपोर्ट में चार श्रेणियों के अपशिष्ट संग्रहण की वर्तमान स्थिति, पंजीकृत बल्क वेस्ट जनरेटरों की संख्या व अनुपालन, केंद्रीय पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड के पोर्टल पर निकाय की पंजीयन की स्थिति, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी की संख्या व संचालन, लीगेसी डंपसाइट की संख्या व बायो रिमेडिएशन की स्थिति, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के क्रियान्वयन के लिए प्रस्तावित समयसीमा और फोटोग्राफिक साक्ष्य (वर्तमान अधोसंरचना की स्थिति) जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल होनी चाहिए। शासन ने मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।

इस खबर को शेयर करें:

8690517c9326392a68531b5faf7668b00e00b86685972a50e34c21832c7c1c6c?s=90&d=mm&r=g

Editorial

News Room

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से 1988 से निरंतर प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र 'केलो प्रवाह' का यह Official Digital News Room है। हमारी संपादकीय टीम देश और छत्तीसगढ़ की प्रमुख खबरों, सीएम की गतिविधियों और शासन की जनहितैषी योजनाओं को प्रमुखता से साझा करती है। किसानों के हित में समर्पित हमारी टीम, 'जल, जंगल और जमीन' से जुड़े संवेदनशील मुद्दों और विभिन्न विभागों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाली रिपोर्टिंग के साथ ही सुदूर अंचलों की ज़मीनी हकीकत को सामने लाती है। जनहित से जुड़ी गतिविधियों, खनिज और औद्योगिक क्षेत्रों की 'Exclusive' खबरों को Evidence के साथ प्रमाणिकता से प्रकाशित करना हमारी प्राथमिकता है। राजनीति, प्रशासन, अपराध, स्पोर्ट्स, रोज़गार, खेती-किसानी और धार्मिक विषयों सहित हर क्षेत्र की खबरों को पूरी शुचिता के साथ प्रस्तुत करना ही हमारा संकल्प है।

Share: