रायगढ़, (केलो प्रवाह)। खरसिया में ओम हाईट्स एंड डेवलपर्स के आवासीय प्रोजेक्ट पर एक पार्टनर की पत्नी और बेटों ने दावा कर लिया है। दस्तावेज बताते हैं कि उक्त भूमि पार्टनरशिप फर्म के नाम पर की गई थी। डेवलपमेंट के लिए एक का नाम दर्ज किया गया था। भूमि के नामांतरण में एक दिलचस्प बात सामने आई है। पटवारी ने जमीन पर अपार्टमेंट को ही गायब कर दिया। खरसिया में ओम बिल्डर्स एंड डेवलपर्स की संपत्ति को लेकर जो विवाद सामने आया है, उसमें अब राजस्व विभाग का फैला भ्रष्टाचार खुलकर सामने आ गया है। भागीदारी फर्म के दस्तावेजों को अनदेखा करते हुए नामांतरण किया गया।
खरसिया के सुनील कुमार अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, राजेश अग्रवाल और जयेश कुमार मिरानी ने मिलकर 2011 में रियल एस्टेट फर्म ओम बिल्डर्स एंड डेवलपर्स की नींव रखी। उन्होंने बंधवा तालाब के पास भूमि खसरा नंबर 478/16/ख, 479/2, 479/21, 479/22 कुल रकबा 0.356 हे. भूमि को फर्म के नाम ट्रांसफर करवाया। इस पर 25-25 फ्लैट्स के दो अपार्टमेंट बनाने का प्लान किया गया। राजेश अग्रवाल ने इस भूमि को फर्म की पूंजी के रूप में शामिल किया था जिसके बदले 6,79,000 रुपए उनके एकाउंट में ट्रांसफर किए गए। फर्म के पंजीयन में इस बात का जिक्र किया गया है।
निर्माण के पूर्व 2011 में नगर पालिका और नगर तथा ग्राम निवेश से अनुमति भी ली गई। पार्टनरशिप डीड भी विधिवत पंजीकृत कराई गई। 2012 में आयुष शेख नामक ठेकेदार से एग्रीमेंट किया गया। राजेश अग्रवाल की मृत्यु जब हुई, तब एक अपार्टमेंट बन चुका था। रेरा में पंजीयन के बाद रजिस्ट्री करवाई जानी थी। राजेश की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी संगीता देवी, पुत्र ऋषभ अग्रवाल और हिमांशु अग्रवाल ने नामांतरण आवेदन लगा दिया। पटवारी संजय कुमार चौहान ने नामांतरण प्रकरण में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। पटवारी ने भूमि की स्थिति का कॉलम खाली छोड़ दिया। भूमि को कृषि भूमि बताया गया जबकि डायवर्सन हो चुका था। गलत तथ्यों के आधार पर तहसीलदार खरसिया ने नामांतरण कर दिया।
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सारे प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध, एफआईआर दर्ज करने की मांग
ओम बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के अन्य भागीदारों ने सारे प्रमाणित दस्तावेज सुरक्षित रखे हैं। पुलिस से भी शिकायत की जा चुकी है। उनका कहना है कि पटवारी व राजस्व अधिकारियों से सांठगांठ कर नामांतरण करवा लिया गया। फर्म की संपत्ति को बिना अन्य भागीदारों को सूचना नोटिस दिए, अपने नाम करवा लिया गया। इश्तिहार प्रकाशन भी नहीं किया गया। भूमि पर बने अपार्टमेंट में कई किराएदार रह रहे थे। कई फ्लैट्स की बिक्री फर्म ने की थी जिसकी रजिस्ट्री बाकी है। लेकिन फर्म के भागीदारों को बताए बिना ही फ्लैट्स बेचे जा रहे हैं। उन्होंने धोखाधड़ी का अपराध दर्ज करने की मांग की है।


























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