रायगढ़। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद भी अब तक कमेटी का गठन नहीं हो सका है। दरअसल अतिक्रमण हटाने के लिए कई रसूखदार कारोबारियों की दुकानें, कॉम्पलेक्स, ढाबे हटाने होंगे। इसके लिए कोई तैयार नहीं है। एनएच उपसंभाग ने दो साल पहले भी ऐसे लोगों को नोटिस दिए थे जिन्होंने एनएच की सीमा में निर्माण कर लिए थे। लेकिन सामंजस्य के अभाव से समस्या का निराकरण नहीं हो सका। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग ने कुछ कार्रवाई शुरू की है। अदालत ने एनएच किनारे के अतिक्रमण पर कार्रवाई का आदेश दिया है। अब एक कमेटी बनाकर कार्रवाई की जानी है, जिसका आदेश नहीं हुआ है। इधर एनएच उपसंभाग ने दो साल पहले भी कई लोगों को अवैध निर्माण पर नोटिस दिए थे।
ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने अपने मकान, दुकान, कॉम्पलेक्स तक पहुंच मार्ग बनाकर एनएच से जोड़ दिया है। एनएच की सीमा के अंदर निर्माण किए गए हैं। एनएच 49 में ऐसे सौ से अधिक लोगों को नोटिस दिए गए थे। इस पर कोई कार्रवाई इसलिए नहीं हो सकी क्योंकि तब भी कोई एक्शन कमेटी का गठन नहीं हुआ था। मिली जानकारी के मुताबिक निजी संपत्तियों जैसे पेट्रोल पंप, दुकान, मकान, गोदाम में प्रवेश मार्ग के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्रशासक से अनुमति लिया जाना अनिवार्य है, जिन्होंने अनुमति लिए बिना ही निर्माण कर लिया है, उनकी रोड को हटाया जाना है। इस नोटिस के बाद भी एक कमेटी का गठन होना था। टीम जाकर कार्रवाई करती, लेकिन दो साल से इन नोटिस पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। अब सुप्रीम कोर्ट का आदेश आ गया है।
यहां निर्माण की दे रहे अनुमति
एनएच का काफी हिस्सा नगर निगम के अंतर्गत आता है। यहां निर्माण अनुज्ञा देने के पूर्व देखा नहीं जाता कि एनएच से दूरी कितनी है। यही कारण है कि कई लोगों ने अपने बाउंड्रीवॉल, भवन, शोरूम आदि को एनएच से सटाकर बना लिए हैं। रसूखदार कारोबारियों पर कार्रवाई करने में परेशानी होगी इसीलिए कोई कमेटी नहीं बनाई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि एनएच के बीच से 40 मीटर के दायरे में भूमि को आवासीय उपयोग और 75 मीटर तक कमर्शियल यूज पर प्रतिबंध होगा।





















