रायगढ़। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षित भूमि से जुड़े प्रावधानों का पालन नहीं करने के मामले में जिला प्रशासन ने ग्राम बड़े अतरमुड़ा स्थित ग्रीन पार्क कॉलोनी के विकासकर्ता अभिषेक अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई की है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर हुई जांच में ईडब्ल्यूएस भूमि के संबंध में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किए जाने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने की स्थिति सामने आने के बाद कॉलोनी विकासकर्ता का कॉलोनी रजिस्ट्रीकरण प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया है। इसके साथ ही ग्रीन पार्क कॉलोनी के भूखंडों के क्रय-विक्रय पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी गई है।
15 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस भूमि को लेकर मांगा गया था स्पष्टीकरण
एसडीएम रायगढ़ महेश शर्मा ने बताया कि जांच के दौरान कॉलोनी विकासकर्ता से कॉलोनी के लिए निर्धारित 15 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षित भूमि के संबंध में दस्तावेज सहित स्पष्टीकरण मांगा गया था। विकासकर्ता की ओर से जवाब में ग्राम नवापाली, तहसील पुसौर स्थित भूमि को ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित बताया गया। जांच के दौरान प्रशासन ने पाया कि उक्त भूमि वर्तमान राजस्व अभिलेखों में विकासकर्ता के नाम पर कृषि भूमि के रूप में दर्ज है। इस भूमि को सक्षम प्राधिकारी को ईडब्ल्यूएस के लिए हस्तांतरित किए जाने से संबंधित आवश्यक दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि ग्रीन पार्क कॉलोनी से संबंधित बताई गई ईडब्ल्यूएस भूमि निर्धारित क्षेत्र की सीमा में भी नहीं पाई गई।
कॉलोनी रजिस्ट्रीकरण प्रमाण पत्र निरस्त, भूखंडों की खरीदी-बिक्री पर रोक
जांच में सामने आई इन अनियमितताओं के बाद जिला प्रशासन ने कॉलोनी विकासकर्ता अभिषेक अग्रवाल को जारी कॉलोनी रजिस्ट्रीकरण प्रमाण पत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। कार्रवाई के तहत ग्राम बड़े अतरमुड़ा स्थित खसरा नंबर 198/5, रकबा 1.978 हेक्टेयर में विकसित ग्रीन पार्क कॉलोनी के भूखंडों के क्रय-विक्रय पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी गई है। इस आदेश के बाद संबंधित कॉलोनी में नए भूखंडों के अंतरण पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लागू हो गया है।
अब तक हुए भूखंडों के अंतरण की भी जांच
प्रशासन ने मामले को आगे बढ़ाते हुए तहसीलदार रायगढ़ को कॉलोनी विकासकर्ता द्वारा अब तक किए गए भूखंडों के अंतरणों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। तहसीलदार को जांच पूरी कर एक माह के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा। जांच प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित कॉलोनी विकासकर्ता के विरुद्ध छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के तहत दांडिक कार्रवाई की जाएगी।
2015 से 2026 तक स्वीकृत कॉलोनियों की होगी पड़ताल
ग्रीन पार्क कॉलोनी की कार्रवाई के साथ ही जिला प्रशासन ने जिले में स्वीकृत अन्य कॉलोनियों को लेकर भी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर वर्ष 2015 से 2026 तक स्वीकृत कॉलोनियों में ईडब्ल्यूएस भूमि से जुड़े प्रावधानों की व्यापक जांच की जा रही है। इस जांच में ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित भूमि की स्थिति, उसके नामांतरण, मौके पर उपलब्धता, उपयोग तथा संबंधित भूखंडों के क्रय-विक्रय की स्थिति का परीक्षण किया जा रहा है।
जांच के दौरान यदि किसी कॉलोनी में निर्धारित प्रावधानों का उल्लंघन या अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित कॉलोनाइजर के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई में ईडब्ल्यूएस भूमि के लिए निर्धारित वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन को लेकर दस्तावेजी रिकॉर्ड के साथ-साथ मौके की स्थिति का भी परीक्षण किया जा रहा है।






















