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आधार-मोबाईल नंबर नहीं था लिंक, बहन से विवाद के बाद खाया जहर

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रायगढ़। रायगढ़ जिले के खरसिया क्षेत्र के ग्राम बकेली में एक किसान ने जहर खा लिया था। क्षेत्र में यह बात फैल गई कि टोकन नहीं मिलने से त्रस्त होकर किसान ने ऐसा किया। प्रशासन ने आनन-फानन जांच की तो पता चला कि उसकी बहन का भी नाम खाते में दर्ज है जिसका आधार-मोबाईल लिंक नहीं था। बहन से विवाद होने के बाद उसने जहर खा लिया। घटना की जानकारी मिलने के बाद विधायक उमेश पटेल भी अस्पताल पहुंचे थे। बकेली के किसान कृष्ण कुमार गबेल ने रविवार को जहर खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। घटना के बाद गांव और आसपास में यह बात फैल गई कि किसान को टोकन नहीं मिला इसलिए उसने आत्महत्या का प्रयास किया।

प्रशासन ने इसकी जांच करवाई तो कुछ और कहानी सामने आई। खरसिया अंतर्गत ग्राम बकेली में किसान कृष्ण कुमार पिता मनबोध द्वारा जहर सेवन किए जाने की सूचना प्राप्त हुई। प्रशासनिक स्तर पर मामले की पड़ताल की गई, जिसमें सामने आया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना पारिवारिक विवाद के चलते उत्पन्न मानसिक तनाव का परिणाम है, न कि धान विक्रय व्यवस्था या टोकन प्रणाली में किसी प्रकार की त्रुटि के कारण। जांच में ज्ञात हुआ कि किसान कृष्ण कुमार का पंजीयन किसान कोड टीएफ4100490100229 के अंतर्गत कुल 0.063 हेक्टेयर रकबा दर्शित है। वहीं उनकी माता नोनी बाई एवं बहन जानकी बाई का पंजीयन किसान कोड टीएफ4100490100324 के तहत 0.5130 हेक्टेयर रकबा के साथ अलग-अलग दो समितियों (तुरेकेला) में दर्ज है।

धान विक्रय के लिए टोकन कटाने के दौरान माता एवं बहन के आधार कार्ड से मोबाइल नंबर लिंक नहीं होने के कारण ओटीपी जनरेट नहीं हो पा रहा था। इससे टोकन नहीं कट पा रहा था। मौके पर उपस्थित बहन जानकी बाई से चर्चा करने पर उसने बताया कि उसने आधार से मोबाइल नंबर अपडेट करा दिया गया है तथा यह प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। इस प्रकार धान विक्रय से संबंधित टोकन प्रक्रिया में कोई स्थाई या गंभीर तकनीकी समस्या नहीं पाई गई। स्थानीय ग्रामीणों से की गई पूछताछ में यह भी जानकारी सामने आई कि किसान कृष्ण कुमार एवं उनकी बहन जानकी बाई के मध्य पूर्व से पारिवारिक विवाद की स्थिति बनी रहती थी।

घटना के दिन दोनों के बीच कहासुनी हुई, जिससे किसान मानसिक रूप से अत्यधिक व्यथित हो गया और इसी तनाव में आकर उसने जहर सेवन जैसा कदम उठाया। जिला प्रशासन ने बतलाया हुआ गया है कि यह घटना धान खरीदी व्यवस्था, टोकन प्रणाली अथवा किसी प्रशासनिक लापरवाही से संबंधित नहीं है।

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