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खरसिया कॉलेज में बड़ा हादसा टला: सीलिंग की प्लास्टर परत उखड़कर गिरी, जर्जर भवन में खतरे के बीच पढ़ रहे विद्यार्थी

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खरसिया, वेदप्रकाश महंत। रायगढ़ जिले के खरसिया स्थित शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पुराने भवन में जर्जर निर्माण की गंभीर स्थिति सामने आई है। बारिश के दौरान भवन की छत और दीवारों में नमी व सीलन के निशान दिखाई दे रहे हैं। इसी बीच भवन के एक हिस्से में सीलिंग की प्लास्टर परत उखड़कर नीचे गिर गई, जिससे फर्श पर मलबा बिखर गया। टूटे हिस्से में छत के भीतर की लोहे की सरिया भी दिखाई दे रही है। गनीमत रही कि इसकी चपेट में आने से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। पुराने भवन में अभी भी विद्यार्थियों की कक्षाएं संचालित हो रही हैं, ऐसे में भवन की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

सीलिंग की परत उखड़कर गिरी

महाविद्यालय के पुराने भवन में सीलिंग की स्थिति मौके की तस्वीरों में स्पष्ट दिखाई दे रही है। छत की निचली प्लास्टर परत का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिर चुका है और उसका मलबा फर्श पर फैला हुआ है। टूटे स्थान पर लोहे की सरिया बाहर निकल आई है। आसपास की छत पर भी नमी और खराब प्लास्टर के निशान दिखाई दे रहे हैं। बारिश के दौरान पानी रिसने से प्रभावित हिस्से में सीलन की स्थिति बनी हुई है। भवन के इस हिस्से से विद्यार्थियों और महाविद्यालय स्टाफ की आवाजाही होती है। ऐसे में सीलिंग की परत का टूटकर गिरना भवन की मौजूदा स्थिति को सामने लाता है।

बारिश में पानी रिसने से भवन प्रभावित

पुराने भवन की छत और दीवारों पर बारिश के पानी के असर के निशान भी दिखाई दे रहे हैं। कई हिस्सों में सीलन, नमी और काई जमा है, जबकि कुछ स्थानों पर प्लास्टर प्रभावित नजर आ रहा है। लगातार पानी रिसने से भवन की सतह पर नमी बनी हुई है। पुराने लोहे के दरवाजों और जालियों पर भी जंग के निशान दिखाई देते हैं। भवन में पानी रिसने और सीलन की समस्या के बीच क्षतिग्रस्त हिस्सों की स्थिति की जांच कराना जरूरी हो गया है।

विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला

महाविद्यालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अध्ययन के लिए पहुंचते हैं और पुराने भवन में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। ऐसे में सीलिंग की प्लास्टर परत का टूटकर गिरना विद्यार्थियों और महाविद्यालय स्टाफ की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। भवन के जिन हिस्सों में प्लास्टर कमजोर हो चुका है या पानी का रिसाव हो रहा है, उनकी स्थिति की जांच आवश्यक है। इसके साथ ही नमी वाले हिस्सों में मौजूद विद्युत वायरिंग और उपकरणों की सुरक्षा भी जांची जानी चाहिए।

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तकनीकी जांच और मरम्मत की जरूरत

सीलिंग की प्लास्टर परत गिरने की घटना के बाद पुराने भवन की तकनीकी जांच कराया जाना जरूरी है। छत, सीलिंग और दीवारों के प्रभावित हिस्सों की स्थिति का आकलन करने के साथ पानी रिसने के कारणों की जांच कर आवश्यक मरम्मत कराई जानी चाहिए। प्रभावित हिस्सों की विद्युत व्यवस्था का परीक्षण भी जरूरी है। समय रहते इन कार्यों को पूरा किए जाने से भवन में अध्ययनरत विद्यार्थियों और महाविद्यालय स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

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Editorial

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