- भू-अभिलेख शाखा में एंट्री करते समय हुई त्रुटि, दीपावली के समय सर्वेयरों के एकाउंट होल्ड
रायगढ़ (केलो प्रवाह)। डिजिटल क्रॉप सर्वे के बाद सर्वेयरों को भुगतान में गड़बड़ी हो गई है। सर्वेयरों को खसरा संख्या के हिसाब से भुगतान करना था लेकिन किसी को ज्यादा तो किसी को कम भुगतान हो गया। इस मामले में कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही भू-अभिलेख शाखा के दो कर्मचारियों को नोटिस दिया गया है।प्रत्येक खेत में लगी फसल के सत्यापन के लिए सरकार ने डिजिटल क्रॉप सर्वे शुरू किया है। गांव के ही युवकों को हर खेत में जाकर तस्वीर खींचकर अपलोड करना होता है। इस तरह से खसरा नंबरों के साथ फसल भी दर्ज होती है। केवल धान की फसल का रकबा पहचानने के लिए डीसीएस किया जाता है।
एक पटवारी के भरोसे काम नहीं हो सकता इसलिए सरकार ने गांव के ही युवकों को यह काम सौंपा। सर्वेयरों को एक खसरा नंबर के बदले दस रुपए दिए जाते हैं। सभी तहसीलदारों ने उनके तहसील में हुए डीसीएस की पूरी जानकारी एक प्रारूप में भरकर भू-अभिलेख शाखा भेजी थी। वहां सॉफ्टवेयर में एंट्री करने के बाद राज्य शासन उसी डाटाबेस पर भुगतान करती है। सभी सर्वेयरों के बैंक एकाउंट डिटेल और राशि सॉफ्टवेयर में दर्ज की गई थी। लेकिन भू-अभिलेख शाखा में एंट्री के समय त्रुटि की गई। सर्वेयरों का डाटा आपस में इंटरचेंज हो गया।
एक सर्वेयर की जानकारी दूसरे के नाम पर दर्ज हो गई। इस आधार पर शासन ने भुगतान भी कर दिया। बाद में पता चला कि कई सर्वेयरों को अतिरिक्त भुगतान हो गया। मुश्किल तो तब हो गई जब सर्वेयरों ने ज्यादा भुगतान देखकर पूरी रकम खर्च कर डाली। इस मामले में भू-अभिलेख शाखा के कर्मचारी तमिन्ना महापात्रे और अरुण डनसेना को नोटिस दिया गया है। इस काम में एक आरआई का भी हस्तक्षेप था।
दीवाली के समय एकाउंट होल्ड
जानकारी होने के बाद अपर कलेक्टर ने डैमेज कंट्रोल करने का प्रयास किया। उन्होंने सबसे पहले सर्वेयरों के एकाउंट होल्ड करवा दिए। सभी तहसीलदारों को वसूली का आदेश दिया गया। मामले को दबाने की भरसक कोशिश की गई। तहसीलों से सही जानकारी आई थी लेकिन भू-अभिलेख शाखा में एंट्री करते समय त्रुटि हो गई। लापरवाही के कारण वित्तीय गड़बड़ी के लिए जिम्मेदारों की जांच हो रही है। इधर एकाउंट होल्ड होने के कारण सर्वेयरों की दिवाली फीकी रह गई। सर्वेयरों से राशि वापस जमा करने को कहा जा रहा है।
























