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तमिलनाडु में थलापति विजय की सरकार का रास्ता साफ, कांग्रेस के साथ ने बदला राज्य का पूरा सियासी भूगोल

vijay congress alliance

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीतिक बिसात पर एक ऐसा उलटफेर देखने को मिला, जिसने न केवल राज्य बल्कि देश के बड़े सियासी पंडितों को भी चौंका दिया है। हालिया विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभरी अभिनेता विजय की पार्टी ‘तमिलागा वेट्री कझगम’ (TVK) अब सत्ता के सिंहासन के बेहद करीब पहुंच गई है। इस पूरी पटकथा में सबसे निर्णायक मोड़ तब आया जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपनी पुरानी सहयोगी डीएमके का साथ छोड़कर विजय को समर्थन देने का आधिकारिक ऐलान कर दिया। कांग्रेस के इस अप्रत्याशित फैसले ने तमिलनाडु की राजनीति में दशकों से चले आ रहे समीकरणों को रातों-रात बदल कर रख दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिनेमाई पर्दे का यह महानायक वास्तविक जीवन में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर तय कर पाएगा? हालांकि, कांग्रेस का यह ‘हाथ’ विजय के साथ तो आया है, लेकिन इसके पीछे शर्तों की एक लंबी फेहरिस्त भी जुड़ी हुई है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि कांग्रेस ने यह समर्थन भविष्य की एक बड़ी रणनीति के तहत दिया है। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की सहमति के बाद तैयार हुए इस गठबंधन के बदले कांग्रेस ने विजय के सामने दो ऐसी शर्तें रखी हैं, जो गठबंधन की मजबूती और विचारधारा की दिशा तय करेंगी। पहली शर्त के अनुसार, विजय को अपनी होने वाली कैबिनेट में कांग्रेस के दो कद्दावर विधायकों को अहम विभागों के साथ जगह देनी होगी।

वहीं, दूसरी शर्त अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसके तहत टीवीके को यह स्पष्ट वचन देना होगा कि वह भविष्य में किसी भी सूरत में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) या एआईएडीएमके (AIADMK) के साथ कोई राजनीतिक तालमेल नहीं करेगी। कांग्रेस का यह कदम स्पष्ट रूप से तमिलनाडु की धरती पर भाजपा के बढ़ते कदमों को रोकने और क्षेत्रीय राजनीति में अपनी पकड़ दोबारा मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
इस नाटकीय घटनाक्रम ने वर्तमान सत्ताधारी दल डीएमके के खेमे में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। डीएमके ने कांग्रेस के इस रुख को ‘राजनीतिक विश्वासघात’ और पुरानी दोस्ती की पीठ में छुरा घोंपने जैसा बताया है।

गौरतलब है कि पिछले कई चुनावों से कांग्रेस और डीएमके का अटूट गठबंधन रहा है, लेकिन अब इस नए घटनाक्रम ने उस रिश्ते पर पूर्णविराम लगा दिया है। आंकड़ों के गणित पर नजर डालें तो 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा 118 है। टीवीके के 108 और कांग्रेस के 5 विधायकों को मिलाकर यह संख्या 113 तक पहुंच जाती है, जो बहुमत से महज 5 कदम दूर है। इस कमी को पूरा करने के लिए अब विजय की टीम सीपीआई, सीपीएम और वीसीके जैसे छोटे दलों के साथ गहन मंत्रणा कर रही है। यदि ये दल भी समर्थन पत्र सौंप देते हैं, तो थलापति विजय कल चेन्नई में आयोजित एक भव्य समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की कमान संभाल सकते हैं। फिलहाल पूरे प्रदेश की नजरें राजभवन पर टिकी हैं, जहां से किसी भी समय नई सरकार के गठन का बुलावा आ सकता है।

(अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न समाचार सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं पर आधारित है। केलो प्रवाह इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है)

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