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वेदांता हादसे की रिपोर्ट दाखिल करने मांगा दो हफ्ते का समय

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  • एनजीटी ने लिया है स्वत: संज्ञान, ज्वाइंट कमेटी ने किया था निरीक्षण

रायगढ़। 14 अप्रैल को वेदांता पावर प्लांट सिंघीतराई में मरे 25 श्रमिकों की चिता की राख भले ही ठंडी हो गई हो, लेकिन दुर्घटना का प्रभाव अब भी कम नहीं हुआ है। पुलिस और प्रशासन ने वेदांता को बचाने के लिए भरसक प्रयास किए हैं, लेकिन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने केस दर्ज किया था। गठित कमेटी ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है। बीते 14 अप्रैल को वेदांता पावर प्लांट सिंघीतराई में छग का अब तक का सबसे बड़ा औद्योगिक हादसा हुआ था जिसमें 25 कामगारों की मौत हो गई। अत्यधिक दबाव के कारण बॉयलर ट्यूब ब्लॉस्ट हो गया था।

पुलिस ने बीएनएस धारा 106 (लापरवाही से मौत), 289 (मशीनरी के प्रति लापरवाही) और 3(5) (सामूहिक अपराध की मंशा) के तहत प्रकरण दर्ज किया था। आरोपियों में वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल, देवेंद्र पटेल कंपनी प्रबंधक, सुशील बेहरा हेड ओ एंड एम, आशीष पदमवार हेड एचएसई, मनीष लखेरा हेड ई एंड पी, अनिरुद्ध प्रताप प्रोजेक्ट हेड, असीत कुमार  हेड मैकेनिकल एंड मेंटनेस, राजेश कुमार सक् ,सेना हेड ऑपरेशनल, अमोल महाले डिप्टी हेड ऑपरेशनल, सुनील कुमार हेड मेंटेनेंस, सरोज कुमार प्रसाद हेड ऑपरेशन, जस्थी येडुकोण्डलू मैकेनिक बॉयलर मेंटेनेंस, पीताम्बर राठौर लोड ऑपरेशन, अजीत पंडा हेड टर्बाइन

मेंटेनेंस, ब्रजेश लोड ऑपरेशन, नीरज कुमार इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस हेड, राजकुमार भटनागर सी एंड आई मेंटेनेंस हेड, इंद्रजीत बेहरा ए एंड एचपी और अन्य शामिल हैं। मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए गए लेकिन रिपोर्ट का पता नहीं। पुलिस और प्रशासन ने वेदांता पावर के पक्ष में मामले को ठंडा करने की कोशिशें की हैं। एनजीटी ने इस घटना पर स्वत: संज्ञान लिया था। एक ज्वाइंट कमेटी का गठन किया गया था जिसने निरीक्षण किसा था। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच में रिपोर्ट देने के लिए कमेटी ने दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है।

घटना के जिम्मेदारों को बचाने का प्रयास
छग के इतिहास में इतना बड़ा हादसा पहली बार हुआ है, जिसमें 25 श्रमिकों की मौत हो गई। सरकार ने घटना पर दुख जताया लेकिन जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई को ढीली कर दी। एनजीटी ने स्वत: संज्ञान लेते हुए पहली ही सुनवाई में कहा कि इस मामले में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जरूरत है। इसके लिए गठित कमेटी में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से एक प्रतिनिधि, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एक सदस्य, एनआईटी रायपुर के केमिकल इंजीनियरिंग ब्रांच के एक सदस्य और सीईसीबी से एक प्रतिनिधि शामिल रहेंगे।

रिपोर्ट में पूरा घटनाक्रम, ब्लास्ट के कारण, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी, मृत व घायल श्रमिकों की जानकारी, पर्यावरण को पहुंची क्षति, मुआवजे और क्षतिग्रस्त संपत्ति का पुनर्निर्माण आदि बिंदुओं पर तथ्य प्रस्तुत करना होगा। एनजीटी ने चीफ सेक्रेटरी छग शासन को घटना के जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन पर कार्रवाई करने को कहा है। बिना क्लीयरेंस और पर्यावरण शर्तों को पूरा किए बिना यूनिट संचालन करने वाले पर भी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। एनजीटी ने छग सरकार को भी पक्षकार बनाया है।

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