रायगढ़। धान खरीदी को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने अनावरी रिपोर्ट का फिल्टर लगा दिया गया है। पिछले साल की और वर्तमान के औसत उत्पादन के हिसाब से ही किसानों का रकबा सत्यापन करने का आदेश दिया जा रहा है। इस वजह से एक ही ब्लॉक में आसपास की समितियों के उत्पादन में अंतर आ रहा है। किसी समिति में 17 क्विंटल तो किसी में 20 क्विंटल प्रति एकड़ टोकन कट रहा है। इस बार की धान खरीदी में कोचियों और बिचौलियों को नियंत्रित करते-करते अब वास्तविक किसानों पर प्रशासन का डंडा चल रहा है। धान खरीदी में अनावरी रिपोर्ट के आधार पर रकबा सत्यापन हो रहा है। इसी के हिसाब से टोकन काटा जा रहा है। भले ही प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी की जानी है लेकिन अनावरी के हिसाब से ही एंट्री की जा रही है, जहां भी अनावरी से अधिक रकबा सत्यापन हो गया तो पटवारियों को नोटिस दिया जा रहा है।
पटवारियों को कहा जा रहा है कि किसी भी तरह अनावरी से कम ही सत्यापन करें। बचे हुए रकबे का स्पॉट पर ही समर्पण करवाया जा रहा है। उदाहरण के लिए धरमजयगढ़ के कापू में 24-25 में अनावरी 14.95 क्विं. प्रति एकड़ था जो इस बार 19.15 क्विं. हो गया है। यहां पटवारी ने 112 किसानों का रकबा सत्यापन अनावरी से अधिक कर दिया है। लिप्ती में भी पिछले साल औसत उत्पादन 15.72 क्विं. से बढक़र 20.15 क्विं. कर दिया गया है। लिप्ती में भी पटवारी ने 66 किसानों का सत्यापन अनावरी से अधिक कर दिया है। इन दोनों केंद्रों में सबसे ज्यादा धान खरीदा गया है। छाल में 24-25 में अनावरी 16.53 क्विं. था जो इस बार 20.68 क्विं. हो गया है। घरघोड़ा के कुडुमकेला उपार्जन केंद्र में औसत उत्पादन 13.60 क्विं. से बढक़र इस बार 16.45 क्विं. हो गया। पिछले बार हुए घपले के बीच टेंडा नवापारा में भी अनावरी संदेहास्पद है। पिछली बार 13.76 क्विं. थी जो 17.76 क्विं. के हिसाब से सत्यापन किया जा रहा है।
उपार्जन केंद्र में कैसे तय किया अनावरी
अनावरी तैयार करने के लिए आधार फसल कटाई प्रयोग होना चाहिए। जिसमें गांव ही इकाई होनी चाहिए। किसी गांव में उपजाऊ जमीन है तो वहां एक एकड़ में 25 क्विं. धान भी होता है। अब वहां पटवारी को कहा जा रहा है कि आप 18 क्विं. के हिसाब से सत्यापन करें। प्रत्येक गांव में उत्पादन अलग होता है। नदी के पाट में धान की उपज 25 क्विं. से भी अधिक हो जाता है। यहां किसान को कहा जाए कि आप 19 क्विं. के हिसाब से धान बेचेंगे तो क्या होगा।
तिउर में प्रति एकड़ 23 क्विं. अनावरी
खरसिया में करोड़ों का धान गबन करने वाली तुरेकेला और तिउर केंद्र की अनावरी संदेहास्पद है। 24-25 में तुरेकेला का 23.37 क्विं. और तिउर का 21.15 क्विं. था। 25-26 में तुरेकेला का 18.64 क्विं. और तिउर का 23.12 क्विं. हो गया। महज एक ही साल में उपज में इतना अंतर तो आ नहीं सकता। अनावरी रिपोर्ट ही संदेहास्पद है।
पटवारी को मिल रहा नोटिस, किसान भी चुप
जमरगी डी में किसानों ने इसके विरोध में गाडिय़ां खड़ी कर दी। अनावरी रिपोर्ट तैयार करने के लिए क्या आधार लिया गया है। पुसौर में महानदी किनारे पडिग़ांव में इस वर्ष अनावरी 19.27 क्विं. है जबकि नदी से दूर बिंजकोट में यह 19.99 क्विं. है। गढ़उमरिया में भी अनावरी पडिग़ांव से अधिक है। यह वाकई चौंंकाने वाले आंकड़े हैं।
























