- लागत का कोई अनुमान नहीं, सर्वे की गति धीमी, भू-अर्जन करना सबसे बड़ी परेशानी
रायगढ़। रायगढ़ में एयरपोर्ट के लिए धीमी गति से सर्वे का काम चल रहा है। धान खरीदी खत्म होने के बाद इसमें तेजी आएगी। चार गांवों की करीब 227 हेक्टेयर भूमि ली जाएगी। सबसे बड़ी बाधा आबादी बसाहट को हटाने की है। बस्तियां हटाने और पुनर्वास में ही करोड़ों रुपए का खर्च आएगा क्योंकि गांवों में पक्के मकान अधिक हैं। जिले को हवाई सेवा से सीधा जोड़ने के लिए एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव है। 2012 में चिह्नित भूमि पर ही एयरपोर्ट बनाया जाना है। प्रभावित भूमि का सर्वे किया जा रहा है। धान खरीदी के कारण सर्वे की गति धीमी है। प्रारंभिक रूप से देखा जा रहा है कि जो जमीनें पहले खाली थी, उनमें से कई में निर्माण हो गए हैं, सिंचाई की सुविधा हो गई है। इस वजह से जमीन की दर बढऩी तय है। नई गाइडलाइन दरों के कारण भी प्रोजेक्ट की लागत बढ़ेगी।
पुसौर तहसील के कोंड़ातराई में 184 किसानों की 64 हेक्टेयर, औरदा में 75 किसानों की 29 हेक्टेयर, बेलपाली में 44 किसानों की 48 हेक्टेयर और जकेला 132 किसानों की 86 हेक्टेयर कुल 227 हे. जमीन चयन की गई थी। इसके अलावा हवाई पट्टी की 23 एकड़ जमीन भी ली जानी है। यह एयरपोर्ट 4 सी वीएफआर कैटेगरी का होगा। सबसे बड़ी दिक्कत भूमि अधिग्रहण की ही है। रायगढ़ जिले में जिस तरह का माहौल बन गया है, इससे परेशानी बढ़ गई है। पुनर्वास को लेकर एक बड़ी बाधा सामने आएगी। सूत्रों के मुताबिक कुछ बस्तियां भी खाली कराई जाएंगी। जिनके पक्के मकान हैं, उनको मोटी रकम बतौर मुआवजा देनी पड़ेगी। इसके अलावा अलग जगह पर जमीन देकर उनको बसाना पड़ेगा। ऐसा करना आसान नहीं है। इसलिए अधिकारियों की पेशानी पर बल पड़ गए हैं।
बहुत बड़ी उपलब्धि होगी
रायगढ़ जिले में एनटीपीसी, जिंदल ग्रुप, अडाणी समूह, एसईसीएल, हिंडाल्को, सारडा एनर्जी, टोरेंट पावर, जेएसडब्ल्यू स्टील जैसे देश के शीर्ष उद्योग समूह अपनी इकाईयां शुरू कर चुके हैं। इस लिहाज से रायगढ़ में एयरपोर्ट की स्थापना तय मानी जा रही है। ऐसा हुआ तो यह जिले के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। इसके लिए सरकार को दिल खोलकर बजट आवंटित करना होगा। संभावित एयरपोर्ट के आसपास की जमीनों पर भूमाफिया सक्रिय हो चुके हैं।























