रायगढ़। धरमजयगढ़ में बंगाली शरणार्थियों को बसाने के लिए सरकार ने जमीनें दी थीं। कई परिवार वापस अपने मूल स्थान चले गए तो कुछ की मृत्यु हो गई। ऐसी जमीनों को चिन्हांकित कर महादेव बैरागी नामक व्यक्ति ने अपना नाम चढ़ा लिया। आज उसके परिवार के नाम पर करीब 40 एकड़ आवंटित भूमि है। केलो प्रवाह ने मामले का खुलासा किया जिसके बाद कलेक्टर ने सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। एक बार जांच रिपोर्ट भेजी गई थी जिसे और पुख्ता करने के लिए कहा है ताकि धोखाधड़ी करने वाला न बच सके। रायगढ़ में जमीन घोटालों पर कार्रवाई नहीं होती, इसलिए हर साल एक नया मामला खुलता है।
बजरमुड़ा, महाजेंको, रेल लाइन, एनटीपीसी लारा, एनएच, तलाईपाली में भू-अर्जन घोटालों के लिए जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी आज भी मजे से अपनी जिंदगी जी रहे हैं क्योंकि सरकार ने कार्रवाई का साहस नहीं दिखाया। नतीजा यह हुआ कि दागी अफसर और कर्मचारी बेलगाम हो गए। धरमजयगढ़ में बांग्लादेश संघर्ष के कारण विस्थापित हुए परिवारों को बसाया गया था। किसी को पांच तो किसी को सात एकड़ जमीन कृषि कार्य के लिए मिली थी। इस जमीन का डायवर्सन और उपयोग अन्य प्रयोजन के लिए नहीं किया जा सकता था और न ही इसे बेचा जा सकता है।
महादेव पिता मणींद्र बैरागी नामक व्यक्ति ने करीब 40 एकड़ शासकीय पट्टे की जमीन अपने और परिजनों के नाम कराई हैं। बायसी कॉलोनी में खनं 85/1 रकबा 2.0230 हे. और 85/2 रकबा 0.8100 हे. महादेव के परिवार के नाम पर है। खनं 85/2 व्यावसायिक औद्योगिक प्रयोजन के लिए डायवर्टेड हो चुकी है। इसी तरह धरमजयगढ़ कॉलोनी में खनं 114/2 रकबा 0.809 हे. भी डायवर्टेड है। यह भी महादेव के नाम पर है। कलेक्टर ने इस मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई करने को कहा है। बताया जा रहा है कि राजस्व विभाग अपनी प्रक्रिया से कार्रवाई करेगा। साथ ही एफआईआर भी दर्ज करवाई जाएगी।
पत्नी के नाम भी की जमीन
जमीन का आवंटन परिवार के मुखिया के नाम पर ही होता है। सालों पहले आवंटित जमीनें अब महादेव, उसकी पत्नी पारुल और पुत्रों के नाम पर हैं। सवाल यह है कि क्या पति-पत्नी को अलग-अलग आवंटन हुआ। यदि नहीं हुआ तो कैसे उनके नाम दर्ज हैं। रजिस्ट्री भी नहीं हुई। बस पटवारी ने कलम उठाई और जमीन पर नाम दर्ज कर दिया।
केसीसी लोन का क्या होगा
सबसे बड़ी मुश्किल बैंकों को होने वाली है। महादेव ने धोखे से कब्जाई जमीन को बैंक में बंधक रखकर लाखों रुपए लोन लिया है। प्रशासन जमीन वापस ले लेगी तो बैंक अपनी रकम कैसे वसूल करेंगे। ऐसी स्थिति में लोन डूब जाएगा। जमीन सरकारी खाते में दर्ज होने के बाद बैंक नीलाम भी नहीं कर सकता। बायसी में खनं 80/1/क/14 रकबा 1.809 हे., 80/1/क/25 रकबा 0.437 हे., 80/1/क/24 रकबा 0.304 हे., 80/1/क/8 रकबा 1.850 हे., 80/1/क/19 रकबा 0.304 हे., 80/1/क/18 रकबा 0.304 हे., 80/1/क/16 रकबा 1.173 हे., 80/1/क/21 रकबा 0.500 हे., 80/1/क/17 रकबा 1.850 हे. पर लोन लिया गया है। यह जमीन महादेव, महावीर, विश्वजीत, पारुल, महानंद, सुजीत आदि के नाम पर हैं।























