- खरीदने के बाद डायवर्सन भी करवाया, आदिवासी को खेती करने के लिए मिली थी भूमि, नियमों की दुहाई देने वाले राजस्व अधिकारी खामोश
रायगढ़। पुसौर तहसील के नावापाली में शासकीय पट्टे की जमीन खरीदने-बेचने वालों के विरुद्ध जांच शुरू हो गई है। रायगढ़ अनुविभाग में ऐसी गड़बड़ी सामने आने के बाद सब हैरान हैं। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में दोनों को नोटिस दिया जाएगा। वर्तमान में पूरे जिले में रायगढ़ अनुविभाग को आदर्श कार्यालय की तरह प्रस्तुत किया जा रहा है। यहां राजस्व सुधार के लिए काम किए जा रहे हैं। अधिकारी भी अपना कत्र्तव्य सही तरीके से निभा रहे हैं, लेकिन इस बीच नावापाली में शासकीय पट्टे की भूमि खरीदने और बेचने का मामला सामने आया जिसके बाद आमजन का भरोसा डगमगाया है। मेडिकल कॉलेज रोड पर पुसौर तहसील के नावापाली में खसरा नंबर 32/8 रकबा 0.809 हे. हीरालाल सिदार नामक आदिवासी को आवंटित थी।
इस जमीन पर केवल खेती की जा सकती है। शासकीय पट्टे की जमीन को बिना कलेक्टर की अनुमति के फागुलाल सिंह पिता बिहारीलाल सिंह जाति राजपूत नामक गैर आदिवासी ने खरीद लिया। इस तरह से एक आदिवासी फिर से भूमिहीन हो गया। फागुलाल ने जमीन से अवैध कमाई करने के लिए इसे दूसरे को पलटी कर दिया। 23 फरवरी 2026 को फागुलाल ने इसकी रजिस्ट्री पीजी इंटरप्राइजेस संचालक प्रमोद अग्रवाल के नाम पर करवा दी। इसके बाद भूमि का डायवर्सन एसडीएम रायगढ़ ने कर दिया। अब एसडीएम रायगढ़ ने इस मामले को संज्ञान में लेकर पूरी फाइल तलब की है। मूल आवंटी और दोनों खरीदारों को नोटिस देने की तैयारी की गई है।
नामांतरण के पहले भी कोई नहीं देख सका
इस जमीन का नामांतरण नई सुविधा के तहत हुआ है। जब सरकार ने नामांतरण की प्रक्रिया को तहसीलदारों से छीनकर उप पंजीयक को दिया था, तब इस पर सवाल उठे थे। उप पंजीयकों के पास जमीनों के कोई रिकॉर्ड देखने की सुविधा नहीं होती। इस वजह से रजिस्ट्री के बाद बिना देखे नामांतरण हो रहे हैं। यदि तहसीलदार ही नामांतरण करते तो आवेदन पर रिकॉर्ड मंगवाते।

























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