रायगढ़, 10 अगस्त। करोड़ों के डीएमएफ, सीएसआर वाले जिले में अगर किसी अस्पताल में सोनोग्राफी के लिए डॉक्टर न हों तो इससे ज्यादा शर्म की बात नहीं हो सकती। इसकी वजह से क्षेत्र की हजारों महिलाओं को रायगढ़ जाना पड़ता है। जिला स्तरीय जन समस्या निवारण शिविर में भी इसकी शिकायत हुई। जनता के दुख-दर्द जानने के लिए सरकार ने जन समस्या निवारण शिविर का कॉन्सेप्ट अपनाया है। इसमें कई ऐसी समस्याएं भी आ रही हैं जिसको अब तक हल हो जाना था। रायगढ़ जैसे भरपूर राजस्व देने वाले जिले में लोगों को अगर स्वास्थ्य सुविधा न मिले तो फिर चिंतन करना चाहिए। गुरुवार को लैलूंगा के तोलगे में जिला स्तरीय जन समस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया।
इसमें लैलूंगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की एक बड़ी समस्या सामने आई। सीएचसी में सोनोग्राफी की मशीन पड़ी हुई है लेकिन कोई रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं है। क्षेत्र की गर्भवती माताओं को 50 किमी दूरी तय करके रायगढ़ जाना पड़ता है। सोचिए कि गर्भवती महिलाओं को भागमभाग ट्रैफिक और जर्जर सड़क से होकर रायगढ़ पहुंचना पड़ता है। इस परेशानी को शिविर में रखा गया, लेकिन इसके निराकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग कोई कोशिश करेगा, इसमें संदेह है। किसी को अंदाजा भी नहीं है कि कितनी परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ रही है। केवल सोनोग्राफी कराने के लिए रायगढ़ दौड़ना पड़ रहा है।
रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में भी यही हाल
जिले में हर साल डीएमएफ से करीब 70 करोड़ रुपए प्राप्त होते हैं। इसके बाद भी खनन प्रभावित क्षेत्रों की हालत नहीं सुधरी। तमनार और लैलूंगा ब्लॉक में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा चुकी हैं। लैलूंगा से रायगढ़ आने वाली गर्भवती माताओं को यहां भी कोई राहत नहीं मिलती। मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। यही कारण है कि सोनोग्राफी सेंटरों की चांदी है।























