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एयरपोर्ट के लिए सुगबुगाहट, किसान कर रहे रोक हटाने की मांग, पुसौर के चार गांवों में होना है भू-अर्जन, खरीदी-बिक्री पर प्रतिबंध

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रायगढ़। आने वाले समय में रायगढ़ में एयरपोर्ट का पुराना प्रोजेक्ट वापस से पटरी पर आ सकता है। इसी वजह से चार गांवों में जमीन खरीदी-बिक्री पर प्रतिबंध नहीं हटाया जा रहा है। करीब 12 सालों से एयरपोर्ट निर्माण पर सुगबुगाहट चल रही है। बढ़ते उद्योगों के कारण रायगढ़ में एयरपोर्ट की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। कोंड़ातराई, औरदा, बेलपाली और जकेला की करीब 600 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। कोंड़ातराई में प्रदेश का दूसरा नेशनल एयरपोर्ट बनाया जाएगा, साथ ही यहां नया रायगढ़ भी बसाया जाएगा। इसके लिए करीब 592 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इसमें कोंड़ातराई, औरदा, बेलपाली और जकेला गांव प्रभावित हो रहे हैं।

वर्ष 2013 के आसपास एयरपोर्ट निर्माण के लिए प्रयास प्रारंभ हुए। जब जिला प्रशासन ने एयरपोर्ट और नया रायगढ़ के लिए जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की थी। चारों गांवों में जमीन खरीदी-बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया। लेकिन बाद में एयरपोर्ट अथॉरिटी ने करीब 800 एकड़ की मांग की। इसके बाद प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। शहर से करीब दस किमी दूर कोंड़ातराई एयरपोर्ट बनाने के लिए हवाई पट्टी की 23 एकड़ और चार गांवों की 569 एकड़ जमीन ली जानी है।

प्रतिबंध नहीं हटाया मतलब प्रक्रिया चालू है

करीब 10 साल से चारों गांवों में भूमि खरीदी-बिक्री पर प्रतिबंध लगा हुआ है। ग्रामीण कई बार मांग कर चुके हैं लेकिन कोई आदेश नहीं आया। दो चरणों में बनने वाले इस नेशनल एयरपोर्ट के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और रायपुर के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने विस्तृत निरीक्षण किया था। अब तक भू-अर्जन नहीं हुआ है लेकिन प्रतिबंध भी बरकरार है। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार इस प्रोजेक्ट को आने वाले दिनों में आगे बढ़ा सकती है।

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Editorial

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