जगदलपुर। हमेशा अपने घने जंगलों और आदिवासी संस्कृति के लिए पहचाना जाने वाला बस्तर अब एक बेहद मीठी और कीमती वजह से सुर्खियों में छाया हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बस्तर की माटी ने एक ऐसा कमाल कर दिखाया है जिस पर एक पल को यकीन करना थोड़ा मुश्किल लगता है। जरा सोचिए, अगर महज एक किलो आम बेचने पर किसी किसान की जेब में ढाई लाख रुपये आ जाएं, तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं होगा। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में दो से ढाई लाख रुपये प्रति किलो के भाव से बिकने वाला जापान का मशहूर ‘मियाजाकी’ आम अब जगदलपुर में भी फलने लगा है। इलाके में ‘ट्री मैन’ के नाम से मशहूर संपत झा के खेत में उगे इस बेशकीमती आम की तस्वीरें और खबरें इन दिनों लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
4 साल की मेहनत और जैविक खेती से मिला शानदार नतीजा
सामने आ रही जानकारियों के अनुसार, संपत झा के बगीचे में पेड़ों पर लटके सुर्ख लाल रंग के ये आम किसी बेशकीमती रत्न की तरह चमक रहे हैं। बस्तर जैसी जगह पर इस विदेशी आम का फलना कृषि जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि संपत झा ने आज से करीब चार साल पहले एक प्रयोग के तौर पर इस जापानी आम का पौधा अपनी जमीन पर रोपा था। उनके मन में यह जानने की उत्सुकता थी कि क्या यहां का मौसम इस खास पौधे के अनुकूल साबित होगा या नहीं। स्थानीय खबरों की मानें तो, संपत जी ने रासायनिक खादों से पूरी तरह दूरी बनाते हुए इस पौधे को सिर्फ जैविक खाद के सहारे पाला। सिंचाई की सही व्यवस्था से लेकर मौसम की मार से बचाने तक, हर छोटी-बड़ी बात का बारीकी से ध्यान रखा गया। आज उसी कड़ी मेहनत का नतीजा है कि उनके खेत में पहली बार यह पेड़ फलों से पूरी तरह लद गया है।
आखिर क्यों कहा जाता है इसे ‘सूरज का अंडा’?
अब सवाल यह उठता है कि आखिर इस आम में ऐसा क्या है जो इसकी कीमत इतनी ज्यादा है? दरअसल, मूल रूप से जापान के मियाजाकी प्रांत में पैदा होने वाले इस आम को इसकी दुर्लभता के लिए जाना जाता है। आम तौर पर हम जिन आमों को देखते हैं वो पकने पर पीले या हरे होते हैं, लेकिन मियाजाकी पकने के बाद एक खूबसूरत गहरे लाल रंग का हो जाता है। अपनी इसी खास चमक और रंगत के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसे ‘एग ऑफ सनशाइन’ यानी ‘सूरज का अंडा’ भी कहा जाता है। इसका स्वाद बेतहाशा मीठा होता है और इसके भीतर मौजूद गजब के पोषक तत्व इसे आमों की दुनिया का बेताज बादशाह बना देते हैं।
किसानों के लिए खुल सकता है मुनाफे का नया दरवाजा
बस्तर में इस जापानी आम के फलने से कृषि विशेषज्ञों में भी भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र बस्तर के वैज्ञानिक धर्मपाल केरकेट्टा के हवाले से आई रिपोर्ट बताती है कि बस्तर की आबोहवा में खेती के लिए एक खास तरह का वरदान है। यहां की पर्याप्त बारिश, संतुलित तापमान और खनिजों से भरपूर मिट्टी इस जगह को विदेशी फलों के लिए बेहद मुफीद बनाती है। जानकारों का साफ मानना है कि संपत झा की यह सफलता इस बात का पक्का सुबूत है कि अगर स्थानीय किसान थोड़ी सी वैज्ञानिक पद्धति अपनाएं, तो बस्तर आने वाले वक्त में उन्नत बागवानी और विदेशी फलों की खेती का एक बहुत बड़ा केंद्र बन सकता है।
यह खबर आसपास के उन किसानों के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरी है, जो पीढ़ियों से पारंपरिक फसलों पर ही निर्भर रहे हैं। कम जमीन में ज्यादा मुनाफा कमाने का यह नया विकल्प किसानों की तकदीर बदलने की ताकत रखता है।
























