- केलो परियोजना में सिंगल बिड की कहानी बहुत पुरानी, मुख्य नहर के किनारे पहाड़ को बांधने के लिए फिर से उसी ठेकेदार को मिला एबव में काम
रायगढ़, (केलो प्रवाह)। भले ही केलो परियोजना विभाग दावे के मुताबिक किसानों तक पानी पहुंचाने में फेल हुआ हो, लेकिन ठेकेदारी सिस्टम को बचाकर रखा गया है। दस साल पहले शॉट क्रिट के काम में एक ठेकेदार को चार करोड़ ज्यादा रेट स्वीकृत किया गया था। दस साल बाद भी कुछ नहीं बदला। उसी ठेकेदार को 55 प्रश एबव में ठेका दिया गया है, जो सवालों के घेरे में है। वर्ष 16-17 में भगवानपुर के पास केलो मुख्य नहर के किनारे पहाड़ को बांधने के लिए ठेकेदार विजय मिश्रा एवं शैलेंद्र मिश्रा को दो बार काम मिला।
दोनों बार 35-50 प्रश तक एबव टेंडर ही पास हुआ। केलो डैम से पुसौर तक बनाई गई मुख्य नहर के रास्ते में भगवानपुर के पास पहाड़ी है। नहर के दोनों ओर पहाड़ स्थित हैं। विभाग ने पाया कि पहाड़ से पत्थर व मिट्टी का कटाव हो रहा है जिससे नहर जाम हो रही थी। इसके लिए बुद्धिमान अफसरों ने रास्ता निकाला कि पहाड़ पर शॉटक्रिटिंग की जाए। इसके तहत पहाड़ को कटाव से बचाने के लिए बांध दिया जाए। पहले 180 मीटर के लिए टेंडर कॉल हुआ। इसके लिए 2.45 करोड़ की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन सिंगल टेंडर में यह काम विजय मिश्रा एवं शैलेंद्र मिश्रा की फर्म को 3.34 करोड़ में दिया गया।
इस तरह करीब 36 प्रश एबव टेंडर पास हुआ। यह काम जैसे-तैसे पूरा हुआ तो फिर विभाग ने 450 मीटर शॉटक्रिट का काम और निकाल लिया। इस बार नहर के दूसरी तरफ 80 मीटर व पहले के काम में जोडक़र 370 मीटर की शॉटक्रिटिंग की जानी थी। कुल 450 मीटर के लिए 4.72 करोड़ की स्वीकृति दी गई थी। सिंगल टेंडर में इस बार भी काम विजय मिश्रा व शैलेंद्र मिश्रा को करीब 7 करोड़ में दे दिया गया। तब 49 प्रश एबव टेंडर हुआ।
दस साल बाद भी कुछ नहीं बदला, रेट और ज्यादा
अब अठारह नाले के नजदीक फिर से शॉट क्रिट का काम मंजूर किया गया। 3.65 करोड़ रुपए की स्वीकृति थी जिसमें 55 प्रतिशत अधिक दर पर काम दिया गया। उसी ठेकेदार को 5.65 करोड़ रुपए में टेंडर दिया गया। दस साल बाद भी सिंगल टेंडर और एबव रेट की कहानी बरकरार रही। बताया जा रहा है कि दस साल पहले किए गए काम की गुणवत्ता खराब थी। घटिया काम की जांच भी हुई। पुष्टि के बावजूद उसी फर्म को दोबारा ठेका मिला।























