- किसानों को प्लांट लगाने का झांसा देकर खरीदी जमीन, अब एनटीपीसी से वसूलेगा मोटा मुआवजा
रायगढ़, (केलो प्रवाह)। रायगढ़ जिले में कॉरपोरेट शक्तियों ने जितनी मनमानी की है, उससे सैकड़ों अन्नदाता भूमिहीन हो चुके हैं। पहले उद्योग लगाने के लिए सरकार से एग्रीमेंट किया। फिर किसानों को झांसा देकर उनकी जमीनें औने-पौने दाम में खरीद ली। बाद में प्लांट ही नहीं लगाया। जिंदल इंडिया थर्मल पावर लिमिटेड ने पुसौर के लोहाखान में करीब पौने दो सौ एकड़ जमीन खरीदी है। कंपनी के दो मुलाजिमों के नाम से भूमि दर्ज है। अब इस गांव में एनटीपीसी लारा के लिए भू-अर्जन किया जाना है।सालों साल अपने पैतृक भूमि पर खेती करके अपना और पूरे देश का पेट भरने वाला किसान, धीरे-धीरे अपनी वही जमीन खो रहा है।
औद्योगीकरण बढ़ाने के लिए खेतिहर जमीनें कुर्बान की जा रही हैं, जहां भू-अर्जन हो सकता था, वहां कंपनियों को जमीनें खरीदने की खुली छूट दी गई। जेएसडब्ल्यू एनर्जी के बाद अब एक और कंपनी का मामला सामने आया है। जिंदल इंडिया थर्मल पावर लिमिटेड वसंत कुंज नई दिल्ली ने पुसौर के तीन गांवों में प्लांट लगाने की इच्छा जताई थी। छग सरकार ने कंपनी को हाथोंहाथ लिया और एग्रीमेंट किया। इसके बाद कंपनी को प्रोजेक्ट रिपोर्ट दाखिल कर भू-अर्जन प्रक्रिया शुरू करनी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
कंपनी ने अपने मुलाजिमों के नाम से किसानों से सीधे जमीनें खरीदी। लोहाखान में 378 खसरा नंबरों की 71.527 हे. (176 एकड़) जमीन खरीद ली। सुरेंद्र गर्ग निवासी विनोबा नगर रायगढ़ के नाम से 255 खसरा नंबरों की 47.346 हे. भूमि की रजिस्ट्री करवा ली। कंपनी यहीं पर नहीं रुकी बल्कि और जमीनें खरीदी जाती रही।
सुरेंद्र और सुधीर के नाम पर कई जमीनें
जिंदल इंडिया थर्मल पावर लिमिटेड वसंत कुंज नई दिल्ली ने सुधीर राठौर पिता राजेंद्र राठौर निवासी विनोबा नगर रायगढ़ के नाम पर 79 खसरा नंबरों की 14.346 हे. भूमि खरीद ली। इसी तरह कंपनी के ही नाम पर 44 खसरों की 9.586 हे. जमीन भी खरीद ली है। इस तरह कंपनी ने 255 खसरा नंबरों की 71.527 हे. (176 एकड़) भूमि खरीद ली गई। पावर प्लांट लगाने की बात कंपनी भूल चुकी है। अब कंपनी का कोई मुलाजिम भी नहीं दिखता।
एनटीपीसी करेगी भूमि अधिग्रहण
एनटीपीसी लारा अब स्टेज तीन के लिए दो नए यूनिट की स्थापना करने जा रहा है। इसके लिए प्रभावित गांवों में करीब 500 एकड़ अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है। लोहाखान भी दायरे में आ रहा है। इस बात की पूरी संभावना है कि जिंदल इंडिया थर्मल पावर प्लांट की भूमि एनटीपीसी लारा ले लेगा। मतलब जिस जमीन के लिए किसानों को 5 लाख रुपए प्रति एकड़ दिए गए होंगे, वहां अब डेढ़ करोड़ रुपए प्रति एकड़ का मुआवजा बनेगा। प्लांट लगता तो किसानों को रोजगार और अन्य लाभ होते। अब जमीन भी गई, वाजिब कीमत भी नहीं मिली और प्लांट भी नहीं लगा।























