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चार महीने पहले SDM ने किया है डायवर्सन निरस्त, अब बचाने की तैयारी, वर्तमान एसडीएम और तहसीलदार कर रहे गोलमोल जांच

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  • सरिया में कोटवारी जमीन पर रास्ता निकाला, मन्दिर जाने की पगडंडी को किया बंद

रायगढ़। एक कारोबारी ने बिना डायवर्सन के जमीन पर गोदाम बना लिया और व्यावसायिक उपयोग भी शुरू कर दिया। जानकारी मिली कि कोटवारी जमीन पर रास्ता बना लिया गया। गांव के मंदिर जाने की पगडंडी को बंद कर दिया गया। पता चला कि पूर्व एसडीएम ने डायवर्सन आवेदन ही निरस्त कर दिया था। कलेक्टर के आदेश के बावजूद वर्तमान एसडीएम और तहसीलदार कारोबारी के बचाव में आ गए हैं। यह मामला सरिया से बोंदा रोड पर पंचधार का है। यहां व्यवसायी रुपेश मेहर की भूमि खनं 1038/5 रकबा 0.1980 हे और खनं 1038/6 रकबा 0.1330 हे. स्थित है। इस भूमि के बाईं ओर मेर रोड से लगी हुई मीना देवी की कृषि भूमि खनं 1038/1 स्थित है। सामने कोटवारी सेवा भूमि खनं 1033 रकबा 0.4410 हे. है। रुपेश मेहर ने अपनी जमीन पर लंबा-चौड़ा गोदाम का निर्माण किया है। इसमें आरआर स्टील के नाम से फर्म भी खोली है।

इस गोदाम तक जाने का रास्ता नहीं था, इसलिए रुपेश ने सामने की कोटवारी भूमि पर ही अतिक्रमण कर लिया है। दादागिरी करते हुए शासकीय कोटवारी जमीन को अपने कब्जे में कर लिया है। इस पर तार भी घेर लिया है। राजस्व विभाग में सांठगांठ के कारण उस पर कार्रवाई नहीं हुई। यहीं पर पुजेरीपाली के ऐतिहासिक स्वयंभू शिव मंदिर जाने के लिए संकरा रास्ता था। उस रास्ते को बंद कर दिया गया है। इसकी शिकायत कलेक्टर संजय कन्नौजे से हुई तो उन्होंने सारंगढ़ एसडीएम और सरिया तहसीलदार को जांच के आदेश दिए। दोनों ही अधिकारी जांच और कार्रवाई से कारोबारी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। कोटवारी जमीन पर शासन का आधिपत्य पाने के लिए कोई कोशिश नहीं हो रही है।

जुलाई में हुआ था डायवर्सन आवेदन निरस्त

पंचधार के कोटवारी भूमि पर अतिक्रमण करने वाले रुपेश मेहर ने एसडीएम के समक्ष खनं 1038/5 रकबा 0.1980 हे और खनं 1038/6 रकबा 0.1330 हे. के डायवर्सन के लिए आवेदन किया था। 28 जुलाई को एसडीएम ने आवेदन खारिज कर दिया था। पटवारी प्रतिवेदन में बताया गया था कि उक्त भूमि तक पहुंचने के लिए कोई मार्ग राजस्व अभिलेखों में नहीं है। यहीं पर कोटवारी भूमि और अन्य भूमिस्वामियों की जमीन से होकर मंदिर जाने का रास्ता भी बना है। इतने स्पष्ट प्रतिवेदन को भी वर्तमान एसडीएम और तहसीलदार नहीं मान रहे।

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