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छर्राटांगर में निलम्बित प्रबंधक का भतीजा प्रबंधक, बेटा कंप्यूटर ऑपरेटर

KelopravahDAPNEWS 1

रायगढ़। रायगढ़ जिले में समितियों को कुछ प्रबंधकों की बपौती बना दिया गया है। कहने को प्रशासन इन समितियों को चला रहा है लेकिन हकीकत यही है कि ये प्रबंधक ही हावी हैं। ये किसी को भी नियुक्त कर सकते हैं। पिता सस्पेंड हो जाता है तो अपने बेटे को समिति में घुसा देता है। छर्राटांगर में भी यही हुआ। सहायक समिति प्रबंधक सस्पेंड हुआ तो उसके भतीजे को प्रबंधक का चार्ज दिया। जबकि उसका बेटा भी वहीं कंप्यूटर ऑपरेटर है।सहकारी समितियों को अब पैतृक संपत्ति की तरह चलाया जा रहा है। कोई भी प्रबंधक बने अपने परिजनों को उसमें एंट्री करवाता है। पिता गड़बड़ी करता है तो सस्पेंड होता है। इसके बाद बेटे को प्रबंधक बना दिया जाता है। राजपुर, लैलूंगा, तुरेकेला, तिउर, लोइंग समेत कई जगहों पर यही हुआ।

चुनाव नहीं होने के कारण संचालक मंडल नहीं है। कांग्रेस सरकार आई तो कांग्रेसियों को प्राधिकृत अधिकारी बना दिया गया। अब भाजपा सरकार है तो पार्टी कार्यकर्ता प्राधिकृत अधिकारी हैं। सहकारी संस्था को निजी संपत्ति की तरह चलाया जा रहा है।किसी कोई जवाबदेही नहीं रही। इसलिए अब नियुक्तियों में भी यही हो रहा है। छर्राटांगर सहायक समिति प्रबंधक लक्ष्मीप्रसाद साव में करीब 8 टन डीएपी को बिना पीओएस के बांट दिया था। पूछने पर बताया गया कि मशीन खराब थी। जांच में गबन मिला तो लक्ष्मी साव को सस्पेंड कर दिया गया। इसके बाद उसके भतीजे प्रदीप साव को समिति का चार्ज दे दिया गया। यही नहीं छर्राटांगर में निलंबित मैनेजर के बेटे चेतन साव को कंप्यूटर ऑपरेटर बनाकर पहले ही पोस्टिंग दी जा चुकी है।

बरगढ़ में कंप्यूटर ऑपरेटर बना सर्वेसर्वा
सहकारी समितियों की कमर तोडऩे में इन पुराने मठाधीशों का ही सबसे बड़ा हाथ है। किसी भी तरह से समिति की कमान अपने हाथ में ही रखने की कला इनको आती है। विभाग भी खुलकर इनका साथ देता है। बरगढ़ समिति में प्रभारी सहायक समिति प्रबंधक शंभू चौहान ने करीब 80 टन यूरिया और 27 टन डीएपी को बिना पीओएस के ही वितरित कर दिया। वह सस्पेंड हुआ तो समिति के कंप्यूटर ऑपरेटर भोलाप्रसाद जायसवाल को चार्ज दे दिया गया। जबकि खाद गड़बड़ी में वह भी शामिल है।

कोई रोकने-टोकने वाला नहीं
सहकारी समितियों का संचालन निरंकुश तरीके से किया जा रहा है। पांच साल से चुनाव नहीं होने की वजह से संचालक मंडल है ही नहीं। प्राधिकृत अधिकारी को समिति के कामों से कोई मतलब नहीं है। इसका फायदा उठाकर पुराने प्रबंधक अपने हिसाब से पोस्टिंग करवा रहे हैं। कई समितियों में पिता-पुत्र दोनों पदस्थ हैं। विभाग को इसकी जानकारी है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जाती।

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Editorial

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