रायगढ़। एक समय था जब कांग्रेस सरकार दिनरात केवल गोधन न्याय योजना और गौठानों की बात करती थी। करोड़ों रुपए खर्च करके बनाए गए गौठान अब बेकार हो गए हैं। जितने भी शेड बनाए गए थे, कबाड़ बन गए या चोर काटकर ले गए। कोसमनारा गौठान को आदर्श गौठान बनाया गया था लेकिन अब इसके अंदर तक अतिक्रमण होने लगा है। नेशनल हाईवे किनारे कोसमनारा में गौठान का निर्माण किया गया था। यहां सोलर पैनल, महिला समूहों के लिए शेड, बांस की कारीगरी करने के लिए कर्मशाला, खेती के लिए बोरवेल आदि सुविधाएं दी गई थी। सरकार बदलते ही गौठानों से एक झटके में किनारा कर लिया गया।
भ्रष्टाचार की जांच भी नहीं की और उनका उपयोग भी नहीं किया। कोसमनारा में करीब दस एकड़ में गौठान बनाया गया था। महिला समूहों को कार्य करने के लिए शेड बनाकर दिया गया था। एक कर्मशाला भवन था जहां बांस के कारीगर रहकर काम करते थे। लेकिन अब कर्मशाला भवन को आवास की तरह उपयोग किया जा रहा है। गौठान के गेट की दोनों ओर से अंदर तक किसी ने प्रीकास्ट वॉल बनाकर कब्जा कर लिया है। रोड के दोनों ओर सरकारी जमीन दबा दी गई है। बेहद अफसोस की बात है कि इतनी बड़ी जमीन का कोई दूसरा उपयोग प्रशासन नहीं कर सका। अंदर के शेड कबाड़ होने लगे हैं। जो बिजली कनेक्शन दिया गया था, अब उसका दुरुपयोग हो रहा है।
पम्प और सोलर पैनल गायब
यहां सोलर सिस्टम लगाकर पम्प चलाया जाता था। सब्जियों की खेती भी की जा रही थी। अब यहां कुछ भी नहीं होता। पूरा गौठान उजड़ चुका है। महंगे सोलर पैनल और पम्प का अता-पता नहीं है। इसका सदुपयोग करने के लिए कोई योजना बनती तो गांव के लिए बेहतर होता। सारे गांवों में गौठान के रूप में जमीन सुरक्षित है। लेकिन अब यह अवैध कब्जे की चपेट में आती जा रही है।























