लगता है कलयुग अब अपने चरम पर पहुंच रहा है और इंसानियत धीरे-धीरे दम तोड़ रही है, क्योंकि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो न सिर्फ आपकी आंखों में आंसू ला देगा, बल्कि आपको यह सोचने पर भी मजबूर कर देगा कि आखिर हमारा समाज किस दिशा में जा रहा है। आमतौर पर हमारे भारतीय समाज और गांवों में यह परंपरा रही है कि किसी के सुख में भले ही लोग शामिल न हों, लेकिन दुख की घड़ी में, और खास तौर पर किसी की मृत्यु पर, पूरा गांव एक परिवार की तरह खड़ा हो जाता है, लेकिन इस वीडियो ने उस पुराने भरोसे को आज पूरी तरह से चकनाचूर कर दिया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक बेटी की मौत के बाद उसकी अर्थी को कंधा देने के लिए गांव का कोई भी व्यक्ति आगे नहीं आया, जिसके चलते एक बूढ़े पिता और जवान भाई को ही अकेले यह जिम्मेदारी निभानी पड़ी, जो समाज के मुंह पर एक करारा तमाचा है। जिस बेटी ने उसी गांव की हवा में सांस ली, उसी के अंतिम सफर में गांव का यह सन्नाटा चीख-चीख कर बता रहा है कि हम कितने मतलबी हो गए हैं।
बहाने बनाते लोग और बंद दरवाजों के पीछे छिपी संवेदना
हैरानी और दुख की बात यह है कि जिस गांव की मिट्टी में वह बेटी खेली-कूदी, बड़ी हुई और जहां उसने अपनी पूरी जिंदगी बिताई, आज उसकी अंतिम विदाई के वक्त उसी गांव के लोगों ने मुंह फेर लिया और उसे चार कंधे तक नसीब नहीं हुए। वीडियो में नजर आ रहा मंजर यह बताने के लिए काफी है कि गांव के बाकी लोग या तो अपने घरों के दरवाजे बंद करके बैठे रहे या फिर किसी न किसी बहाने से अंतिम संस्कार में शामिल होने से बचते नजर आए। किसी ने शादी में जाने का बहाना बनाया, तो किसी ने अपने काम का हवाला दिया, और कुछ ने तो चुप्पी ही साध ली। यह दृश्य बताता है कि आज के दौर में इंसानियत किस कदर गिर चुकी है और लोग दूसरों के दुख में दो कदम साथ चलने को भी अब एक ‘बोझ’ समझने लगे हैं। जिस समाज में अंतिम संस्कार को एक पवित्र और सामूहिक जिम्मेदारी माना जाता था, वहां आज एक परिवार को अकेले ही यह भारी बोझ उठाना पड़ा, जो कि एक सामाजिक पतन का जीता-जागता सबूत है।
सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
कांपते हाथों से अपनी ही बेटी की अर्थी उठाते पिता और सूनी आंखों से सब कुछ देखते भाई का यह वीडियो दिल को झकझोर देने वाला है, क्योंकि यह केवल एक शव यात्रा नहीं थी, बल्कि उस संवेदनहीन समाज का जनाजा भी था जो एक लाचार परिवार के आंसुओं को देख नहीं पाया। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को जिसने भी देखा, उसका दिल दहल गया और लोग अब कड़े शब्दों में इस स्वार्थी रवैये की आलोचना कर रहे हैं, क्योंकि दुख के इस पहाड़ जैसे समय में एक कंधा भी न मिलना उस परिवार के जख्मों को और गहरा कर गया है। वीडियो देखने वालों का कहना है कि इस दृश्य ने उन्हें अंदर तक हिला दिया है। एक यूजर ने इस पर बेहद भावुक कमेंट करते हुए लिखा कि ‘मृत समाज की यह एक मात्र लाश है जिसे मोक्ष की प्राप्ति हुई, क्योंकि इसे कम से कम दो कंधे तो मिले, बाकी लोग तो जिंदा होते हुए भी लाश के समान हैं जो मदद के लिए भी घर से बाहर नहीं निकल सके।’
आज वो अकेले हैं, कल बारी आपकी हो सकती है
यह पूरी घटना हम सभी के लिए एक गंभीर चेतावनी और आत्ममंथन का विषय है कि क्या हम वाकई इतने आधुनिक और व्यस्त हो गए हैं कि हमारे पास किसी की मौत पर बहाने वाले आंसू भी नहीं बचे हैं। रिश्ते-नाते, रीति-रिवाज और हमारी रोजमर्रा की व्यस्तताएं अपनी जगह सही हो सकती हैं, लेकिन इंसानियत का दर्जा इन सबसे ऊपर होना चाहिए। अगर आज हम किसी के दुख की घड़ी में उसका साथ छोड़ देंगे और कंधा देने से कतराएंगे, तो यह याद रखना चाहिए कि कल वही अकेलापन और बेबसी हमारे हिस्से में भी आ सकती है।
यह वीडियो समाज से एक तीखा सवाल पूछ रहा है कि क्या यही हमारी इंसानियत है? यह समय है कि हम अपनी गिरेबां में झांकें, क्योंकि अगर समाज इसी तरह संवेदनहीन होता रहा, तो वो दिन दूर नहीं जब दुख बांटने वाला कोई नहीं बचेगा और हम अपनी ही बनाई हुई दुनिया में अकेले रह जाएंगे।






















