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पूरे शहर की गंदगी पहुंची केलो नदी में, यमुना की तरह निकला पानी में झाग

KeloNadi
  • एक दिन की बारिश में सामने आई गंदगी, सिंगल यूज प्लास्टिक से पटी नदी

रायगढ़। केलो नदी को साफ रखने के लिए केवल दिखावा किया जा रहा है। फील्ड पर कोई काम नहीं हो रहा है। शहर का प्लास्टिक कचरा नदी में जाने से रोकने के लिए प्रयास नहीं हो रहे हैं। एक ही दिन की बारिश में केलो नदी प्लास्टिक के कचरे से पट गई है। मंगलवार को दिन में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर वर्कशॉप हुई जिसमें नगर निगम समेत सभी शहरी निकाय और जिले के कई पंचायतों से भी प्रतिनिधि उपस्थित थे। शाम को हुई बारिश ने इस अभियान की पोल खोल दी। हाल ही में नदियों के पुनरुद्धार को लेकर राज्य स्तरीय बैठक हुई।

केलो नदी का 15 किमी का भाग सर्वाधिक प्रदूषित सूची में शामिल है। इससे बाहर आने के लिए केलो नदी को ठोस कचरे और गंदे पानी से मुक्ति दिलानी होगी। अभी भी शहर के कई हिस्सों से प्लास्टिक कचरा नदी में पहुंच रहा है। नालों और नालियों के जरिए गंदगी नदी में डाली जा रही है। मंगलवार की बारिश के बाद बुधवार सुबह नदी की तस्वीर बदल गई थी। पानी तो गंदा था ही, सतह पर प्लास्टिक कचरा तैर रहा था। चक्रपथ के पास बने बायपास रोड पर तो नदी में कचरा ही कचरा नजर आ रहा था। प्लास्टिक बोतलें, पानी पाउच, डिस्पोजल गिलास, पॉलिथिन, प्लास्टिक रैपर आदि से नदी भर गई थी।

यह कचरा उन्हीं नालों से आ रहा है, जिनकी सफाई पिछले दिनों करवाई गई थी। नदी के कई जगहों पर प्लास्टिक कचरा इसी तरह जाम था। बोंदाटिकरा पुल के पास एनीकट में तो हालात बेहद खतरनाक थे। यह प्वाइंट शहर का अंतिम सिरा है। यहां पानी निकल रहा था तो केमिकल युक्त झाग नदी की सतह पर नजर आई। यह उसी तरह था जैसा नई दिल्ली के गंदे पानी से यमुना नदी का हाल हो जाता है। शहर का केमिकल युक्त गंदा पानी केलो नदी में घुसा। कई उद्योगों का पानी भी नालों के जरिए नदी में छोड़ा जा रहा है।

पानी पाउच तक नहीं रोक सके अफसर
पर्यावरण विभाग और नगर निगम को सिंगल यूज प्लास्टिक पर कार्रवाई करनी है। लेकिन चंद किराना दुकानों में पेनाल्टी के अलावा अब तक कुछ किया ही नहीं गया। दरअसल अफसरों की नीयत इस समस्या को खत्म करने की है ही नहीं। आसपास के पानी प्लांटों में पानी पाउच, छोटी बोतलें धड़ल्ले से बनाई जा रही हैं। डिस्पोजल गिलास, चम्मच आदि भी बन रहे हैं। दुकानों में खुलेआम बिक भी रहे हैं। इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। नदी के पास के मोहल्लों से कचरा सीधे नदी में डाला जा रहा है।

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