- जिस खसरा नंबर को आरक्षित किया था, उसका पता नहीं, जो निगम के नाम पर दर्ज उन पर अतिक्रमण
रायगढ़ (केलो प्रवाह)। कई सालों के बाद निजी कॉलोनियों द्वारा दी गई ईडब्ल्यूएस जमीन का हिसाब-किताब लिया जा रहा है। हमने कुछ बिल्डरों द्वारा दी गई जमीनों की पड़ताल की। पता चला कि जमीन का खसरा नंबर तो दिया, लेकिन मौके पर जमीन नहीं है। या तो उस पर प्लॉट काट दिए गए या अतिक्रमण हो गया। रायगढ़ जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में निजी कॉलोनियां बसाने के लिए अनुमति ली गई। विकास अनुज्ञा लेने के बाद लेआउट एप्रुवल लिया गया।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने 2015 से अब तक जिले में विकसित निजी कॉलोनियों में मिली ईडब्ल्यूएस जमीनों की जांच के आदेश दिए हैं। इस आदेश से बिल्डरों में हड़कंप मचा हुआ है। कई बिल्डरों ने कॉलोनी के अंदर जमीन दी, लेकिन अब वह भूमि खोजनी पड़ेगी। नगर निगम आयुक्त और एसडीएम अपने क्षेत्र के प्राइवेट कॉलोनियों की फाइलें जांच रहे हैं। ईडब्ल्यूएस जमीन की लोकेशन खोजी जा रही है। किसी ने पास के गांव में जमीन दी है तो किसी ने कॉलोनी से लगकर जमीन छोड़ी है। बोईरदादर,
गोवर्धनपुर और ढिमरापुर क्षेत्र की कुछ कॉलोनियों की पड़ताल करने पर पता चला कि जो भी जमीन छोड़ी गई थी, वह अब नहीं मिल रही है। बिल्डरों ने इसकी रजिस्ट्री नगर निगम या शासन के नाम नहीं करवाई। कुछ समय बाद इस पर भी प्लॉट काटकर बेच दिए गए। करीब 41 कॉलोनियों ने जमीन नगर निगम को सौंपी है। कुल 20.961 हे. जमीन निगम को मिल चुकी है, जिसमें से तकरीबन 9 हेक्टेयर का उपयोग ईडब्ल्यूएस मकान बनाने के लिए उपयोग किया जा चुका है।
पहुंचने के लिए रास्ता ही नहीं
नगर निगम ने कई कॉलोनियों की जमीन पर पजेशन नहीं लिया है। पूर्व में निगम के कुछ कर्मचारियों ने बिल्डरों से सांठगांठ कर ईडब्ल्यूएस जमीनें बेच दीं। बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसी जगह पर जमीन लेने के लिए मंजूरी दे दी जहां पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं है। नियम के मुताबिक बिल्डर को उस जमीन को डेवलप करके हैंडओवर करना था। उक्त भूमि पर रोड, बिजली, नाली, पानी आदि की सुविधा करने के बाद ही शासन को सौंपा जाना था।























