रायगढ़। तीन अक्टूबर 2023 को केलो नदी में बाढ़ क़े कारण पानी चक्रपथ पर आ गया था। इस दौरान नटवर अग्रवाल ने चक्रपथ से कार पार करने का प्रयास किया, जिससे वाहन नदी में बह गई थी। वहीं कार के भीतर ही पानी में डूबने से नटवर अग्रवाल की मौत हो गई थी। इस मामले में उनकी पत्नी शारदा देवी अग्रवाल ने कार का टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी से बीमा क्लेम किया था, परंतु बीमित राशि कंपनी द्वारा नहीं दिये जाने पर उन्होंने राशि दिलवाने के लिए उपभोक्ता फोरम में वाद दायर कर किया था। इस मामले में उभयपक्ष की सुनवाई के बाद फोरम ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी को मृत्यु बीमा राशि के 15 लाख व मानसिक क्षति एवं वाद व्यय मिलाकर 20 हजार रूपए अदा करने का आदेश दिया है। साथ ही कार की मरम्मत का बिल प्रस्तुत किये जाने पर उसका भुगतान भी करने का निर्देश दिया गया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार नटवर लाल अग्रवाल की टोयोटा कार का टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी से बडंल्ड आटो सिक्योर- प्राईवेट कार पॉलिसी के तहत बीमा करवाया गया था, जिसकी वैधता 31 जुलाई 2023 से 30 जुलाई 2026 तक थी। उक्त पॉलिसी में वाहन स्वामी-चालक के लिए 15 लाख रूपए बीमा का प्रवाधान है। बीमा पॉलिसी में नामिनी के रूप में उनकी पत्नी शारदा देवी अग्रवाल है। वहीं 3 अक्टूबर 2023 की शाम को लगभग साढ़े 7 बजे उक्त कार से नटवर अग्रवाल चक्रपथ से जाने के दौरान केलो नदी में जल प्रवाह बढऩे के कारण कार नदी में बह गई और पानी में डूबने की वजह से नटवर अग्रवाल की मृत्यु हो गई थी। इस पर एक दिसंबी 2023 को शारदा देवी अग्रवाल ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी में आवेदन देकर बीमा क्लेम किया था। वहीं कपंनी ने सर्वेयर के प्रतिवेदन में बीमित व्यक्ति के असवाधानीवश दुर्घटना घटने का हवाला देते हुए बीमा क्लेम अस्वीकार कर दिया था। इस पर शारदा देवी अग्रवाल ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कंपनी को नोटिस दी गई, परंतु नोटिस का जवाब नहीं मिला। वहीं शारदा देवी अग्रवाल ने उपभोक्ता फोरम में बीमा क्लेम दिलवाने की फरियाद करते हुए वाद दायर किया था। फोरम केे अध्यक्ष छमेश्वर लाल पटेल व सदस्यद्वय राजेन्द्र पाण्डेय व राजश्री अग्रवाल ने उभय पक्ष की सुनवाई की, तब कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि केलो नदी मेें दो दिनों से जलस्तर बढ़ा हुआ था और आवागमन अवरूद्ध था, बावजूद इसके नटवर लाल अग्रवाल ने नदी के तेज प्रवाह को नजरअंदाज करते हुए कार को तेज गति से पानी में उतार दिया था। उनके साथ कार के पीछे में बैठी एक महिला कुद गई, जिससे उसकी जान बच गई और नटवार लाल कार में ही रह गये जिससे उनकी मौत हो गई। नटवरलाल अग्रवाल ने जानबुझकर जोखित लेते हुए कार चलाई जिससे उनकी मृत्यू हुई। उक्त कृत्य बीमा पॉलिसी की शर्त का उल्लंघन है लिहाजा बीमा क्लेम नहीं बनता है। उभय पक्ष की सुनवाई तथा उनके द्वारा प्रस्तुत किये गये साक्ष्य एवं अन्य दस्तावेजों के आधार पर फोरम ने यह माना कि कंपनी द्वारा बीमा क्लेम की राशि न देकर सेवा में कमी की है। वहीं वाहन की मरम्म्त का केवल एस्टीमेट दिया गया है और किसी प्रकार का क्लेम मरम्मत के नाम पर नहीं किया गया है। ऐसे में टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी को मृत्यु बीमा का 15 लाख रूपए देने तथा मानसिक क्षति एवं वाद व्यय मिलाकर 20 हजार रूपए अदा करने का आदेश दिया है। साथ ही कार की मरम्मत का बिल प्रस्तुत किये जाने पर उसका भुगतान भी करने का निर्देश दिया गया है।

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