रायगढ़। विजयपुर क्षेत्र में कई स्वीकृत वैध कॉलोनियां आकार ले रही हैं। इसके अलावा आवंटन भूमि और शासकीय भूमि पर बने अवैध मकान सैकड़ों की संख्या में हैं। यहां से पानी निकासी की व्यवस्था करने के लिए नगर निगम वैकल्पिक नाले का निर्माण कर रहा है, लेकिन आगे एक कारोबारी ने सरकारी जमीन पर मिट्टी डंप करके नाले का रास्ता रोक दिया है। अवैध रूप से बसे मोहल्ले और बस्तियां किसी भी शहर के सुनियोजित विकास की राह में रोड़ा हैं। सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से बसे लोग इसे अपनी पैतृक संपत्ति मानने लगे हैं। प्रशासन भी राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए कार्रवाई नहीं करता।
यही वजह है कि लगातार अतिक्रमण होते जा रहे हैं। विजयपुर क्षेत्र इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इस इलाके में आवंटन जमीनों को दो-तीन बार पलटी कर छोटे प्लॉट बनाकर बेच दिए गए। मूल आवंटी भी खेती के बजाय अवैध प्लॉटिंग करने लगा है। सरकारी जमीनें खाली पड़ी थी तो उस पर मोहल्ले बसा दिए गए। पार्षद चुनाव जीतने के लिए अन बस्तियों को वैधता दिलवाई गई। अब इन पर कार्रवाई इसलिए नहीं होती क्योंकि चुनाव जीतना है। अब तो विजयपुर क्षेत्र में एक बड़े कारोबारी ने निगम के नाले का रास्ता रोक दिया है।
अवैध बस्तियों के कारण क्षेत्र से बारिश का पानी आसानी से नहीं निकल पाता। इसके लिए निगम आयुक्त बृजेश सिंह क्षत्रिय ने एक वैकल्पिक नाला बनाने का आदेश दिया था। सरकारी जमीन खनं 135 रकबा 0.7290 हे. पर खुदाई करके नाला बनाया जा रहा था। लेकिन आगे जाकर इस पर मिट्टी पाटे जाने की जानकारी मिली। पता चला कि कमल अग्रवाल नामक भूमिस्वामी ने सरकारी जमीन पर नाला निर्माण रोकने और अतिक्रमण करने के लिए मिट्टी का ढेर लगा दिया है। इसकी शिकायत कमिश्नर से हुई है।
कब मुक्त होंगी सरकारी जमीनें
प्रशासन चाहे कितने भी विकास कार्य कर ले, जब तक अतिक्रमण मुक्त अभियान नहीं चलेगा, तब तक रायगढ़ शहर आदर्श नहीं बन सकता। सडक़ों पर अस्थाई निर्माण, अंदर की जमीनों पर अवैध मकान, बाड़ी, दुकान बनाकर कब्जे कर लिए गए हैं। हर रोड पर शेड को पांच फुट बढ़ाकर कब्जा कर लिया गया है। आउटर में जहां सरकारी जमीन खाली है, उसको क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि की मदद से बेचा जा रहा है। इस पर कोई रोक नहीं है।






















