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शनि मन्दिर मरीन ड्राइव का ठेका 27 करोड़ में दीपक पांडे को

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  • हाउसिंग बोर्ड करेगा एग्रीमेंट, केवल एक तरफ का टेंडर बाकी, एक तरफ नगर निगम और एक तरफ एसईसीएल कर रहा निर्माण

रायगढ़। खर्राघाट से कयाघाट तक केलो नदी किनारे रिवरफ्रंट कॉरीडोर सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। नालंदा परिसर के बाद इस प्रोजेक्ट पर सबकी नजरें टिकी हैं। अब शनि मंदिर की ओर मरीन ड्राइव का टेंडर भी फाइनल हो गया है। दीपक पांडे को 8 प्रश एबव में ठेका मिला है। दूसरे शहरों की तरह केलो नदी किनारों को सुंदर बनाने के लिए रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। काम जल्दी पूरा करने के लिए चारों सिरों का काम अलग-अलग एजेंसियों को दिया गया है। अगले दो सालों में कोई भी केलो के किनारों को पहचान नहीं पाएगा। शनि मंदिर से खर्राघाट तक करीब दो किमी के मरीन ड्राइव के लिए 25 करोड़ की स्वीकृति मिली थी। हाउसिंग बोर्ड ने टेंडर लगाया था जो रायपुर के दीपक पांडे को मिला है।

दीपक पांडे ही नालंदा परिसर भी बना रहे हैं। एसईसीएल और एनटीपीसी लारा ने दिल खोलकर रायगढ़ के विकास कार्यों के लिए फंड स्वीकृत किए हैं। केलो नदी के तस्वीर बदलने के लिए सर्वाधिक प्रदूषित भाग को चुना गया है। कयाघाट से खर्राघाट तक नदी के दोनों किनारों पर मरीन ड्राइव का निर्माण हो रहा है। शनि मंदिर से खर्राघाट तक भी मरीन ड्राइव का काम जल्द प्रारंभ होगा। मिली जानकारी के मुताबिक एनटीपीसी लारा ने करीब 30 करोड़ रुपए सीएसआर के तहत देने की सहमति दी थी। हाउसिंग बोर्ड रायगढ़ को इसका कार्य सौंपा गया है। 25 करोड़ की तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर भी जारी कर दिया गया। 2.05 किमी लंबे इस मरीन ड्राइव का ठेका 8 प्रश एबव में दीपक पांडे को मिला है। टेंडर रेट करीब 27 करोड़ है। अब एग्रीमेंट किया जाना है।

कौन-सा मरीन ड्राइव पहले होगा पूरा

केलो नदी के किनारों को सुंदर बनाने के लिए काम हैंडओवर हो चुका है। अब संबंधित एजेंसियों को तय समय पर काम पूरा करना है। फंड की कमी नहीं होगी क्योंकि सीएसआर से काम होगा। प्रगति नगर वाला हिस्सा नगर निगम बना रहा है। उसके सामने वाला भाग एसईसीएल बना रहा है। अब शनि मंदिर से खर्राघाट तक मरीन ड्राइव को हाउसिंग बोर्ड बनाएगा। कौन सा काम पहले पूरा होगा, बताना मुश्किल है।

एक मरीन ड्राइव बिलो में, बाकी एबव में

लोगों में इस बात की चर्चा है कि कोई मरीन ड्राइव एबव में जा रहा है तो कोई बहुत बिलो में। चारों काम तकरीबन एक जैसे हैं। एसईसीएल का टेंडर बहुत बिलो में गया है। वहीं बाकी दोनों एबव रेट में फाइनल हुए हैं। अब एक ही जैसे काम को कोई ज्यादा रकम लगाकर कर रहा है तो कोई कम।

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Editorial

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