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किस ड्रॉइंग-डिजाइन पर करें काम, SECL के ठेकेदार कन्फ्यूज

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  • नदी के दस फुट अंदर बना रहे रिटेनिंग वॉल, नदी का पाट हुआ संकरा, मरीन ड्राइव

रायगढ़। केलो नदी के सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट में सबसे पहले कयाघाट से चक्रपथ वाले हिस्से को मंजूरी मिली थी। लेकिन काम देखकर लग रहा है कि ठेकेदार खुद कन्फ्यूज है। चार महीने तक तो निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब नदी के दस फुट अंदर रिटेनिंग वॉल बनाकर पाथवे बनाया जाएगा। दरअसल ठेकेदार ने टेंडर के लिए बोली पहले लगाई और ड्रॉइंग-डिजाइन बाद में मिला। रायगढ़ की जीवनरेखा केलो नदी को संवारने के लिए चार रिवरफ्रंट कॉरीडोर का निर्माण हो रहा है। नदी के दोनों किनारों पर कयाघाट से खर्राघाट तक चार भागों में निर्माण किया जाना है। सबसे पहले एसईसीएल ने कयाघाट से चक्रपथ तक का काम हाथ में लिया।

केलो पुल से कयाघाट एसईसीएल ऑफिस तक रिवरफ्रंट कॉरीडोर निर्माण के लिए 44.66 करोड़ की मंजूरी एसईसीएल ने दी थी। सीएसआर से होने वाले इस काम का टेंडर अक्टूबर 2025 में फाइनल हो चुका है। कोरबा की दो फर्म अशोक कुमार मित्तल और आदित्य कंस्ट्रक्शन ने संयुक्त रूप से काम हाथ में लिया है। करीब 28 करोड़ में यह ठेका मिला है। 1.3 किमी लंबे मरीन ड्राइव निर्माण के पूर्व नगर निगम ने जो कॉन्सेप्ट बनाया था, उसी हिसाब से निर्माण होना है। लेकिन डिजाइन बिना देखे ही एसईसीएल ने टेंडर किया था। अब ठेकेदार काम तो कर रहा है, लेकिन पेंच फंस गया है। बताया जा रहा है कि एसईसीएल के एप्रूव्ड प्लान में रोड ही गायब है। अभी नदी के दस फुट अंदर गड्ढा खोदकर रिटेनिंग वॉल बनाई जा रही है। 

नदी का पाट हुआ संकरा, दूसरी ओर भी रिटेनिंग वॉल

मिली जानकारी के मुताबिक एसईसीएल ने कोरबा की ज्वाइंट वेंचर कंपनी को ठेका दिया था जिसका अक्टूबर में वर्क ऑर्डर भी हो गया। काम जल्द शुरू नहीं होने के पीछे ड्रॉइंग-डिजाइन फाइनल नहीं होना है। नदी किनारे गजीबो भी बनाया जाना है, पाथवे भी बनना है, रोड भी बनानी है और स्ट्रीट लाइट और ड्रेनेज सिस्टम भी। जो डिजाइन दी गई है, वह ठेकेदार की समझ से बाहर है। इसलिए बेतरतीब काम हो रहा है। 

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