रायगढ़, (केलो प्रवाह)। जमीन दलालों ने उप पंजीयक कार्यालयों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। धरमजयगढ़ उप पंजीयक ने जब एक आवंटन भूमि की रजिस्ट्री करने से इंकार किया तो दलालों ने रायगढ़ उप पंजीयक ऑफिस में रजिस्ट्री करवा ली। ऐसे कई संदेहास्पद पंजीयन पिछले दो सालों में हुए हैं। वित्त मंत्री ओपी चौधरी चाहते हैं कि जमीनों की रजिस्ट्री कराने में आम आदमी को कोई परेशानी न हो। चुटकियों में काम हो जाए। नामांतरण के लिए भी चक्कर न काटना पड़े। इस सरलीकृत प्रक्रिया का जितना लाभ आम आदमी को मिलना चाहिए, उससे कहीं अधिक जमीन दलालों को हो रहा है। क्या कोई सोच सकता है कि धरमजयगढ़ में जो रजिस्ट्री न हो, वह रायगढ़ में आसानी से हो जाएगी। धरमजयगढ़ के मिरीगुड़ा में खसरा नंबर 558/1/ज रकबा 1.6190 हे. आवंटन भूमि है।
इसके तीन टुकड़े करके बेचा जा चुका है। इसमें से 0.1620 हे. भूमि को बेचने के लिए भूमिस्वामी नारायण पिता मुकुटराम ने टोपीराम पिता पुरुषोत्तम यादव और कृष्णाराम पिता भोजराम से सौदा किया। मात्र 4 लाख में रोड किनारे की जमीन का सौदा हुआ। यह जमीन सरकारी जमीन 558/1/क का ही हिस्सा है। इस जमीन की रजिस्ट्री के लिए धरमजयगढ़ के पूर्व उप पंजीयक से संपर्क किया गया था, लेकिन शासकीय पट्टे की आवंटन जमीन होने की वजह से उन्होंने इंकार कर दिया। इसके बाद जमीन दलालों और भूमिस्वामी ने रायगढ़ उप पंजीयक कार्यालय में रजिस्ट्री कराने का आवेदन किया। उप पंजीयक तनोज कुमार भूआर्य ने विगत 5 दिसंबर 2025 को धरमजयगढ़ की इस जमीन की रजिस्ट्री कर दी।
बाकी जमीन की भी रजिस्ट्री
इसी जमीन में से एक टुकड़ा खसरा नंबर 558/137 रकबा 0.6480 हे. को आकाश जिंदल पिता शिवहरी जिंदल निवासी धरमजयगढ़ को बेच दिया गया। तीसरा हिस्सा खसरा नंबर 558/139 रकबा 0.8090 हे. को अनिल कुमार अग्रवाल पिता ताराचंद अग्रवाल के नाम पर पंजीयन करवाया गया। धरमजयगढ़ में यह नया ट्रेंड चला है।






















