रायगढ़। जिले के चिटकाकानी और त्रिभौना गांव में हर घर नल से जल पहुंचने के बाद ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल और उसकी गुणवत्ता जांचने का प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान ग्रामीणों को पानी के नमूनों में निर्धारित रसायन मिलाकर जांच करने और परिणामों का मानकों से मिलान करने की प्रक्रिया समझाई गई। साथ ही जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से ग्रामीणों को पानी की बर्बादी रोकने की शपथ भी दिलाई गई।
पानी की जांच और फ्लोरोसिस से बचाव की दी गई जानकारी
प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रशिक्षक ने ग्रामीणों को पानी में फ्लोराइड की अधिकता के दुष्प्रभावों के बारे में बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि फ्लोराइड की अधिक मात्रा से फ्लोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। ग्रामीणों को समझाया गया कि वे निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए नियमित रूप से पेयजल की गुणवत्ता का परीक्षण करें, ताकि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचा जा सके।
घर-घर पानी मिलने से दिनचर्या में आया बदलाव
चिटकाकानी और त्रिभौना के ग्रामीणों ने घर पर ही पानी मिलने से दैनिक जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को साझा किया। चिटकाकानी की एक महिला हितग्राही ने बताया कि घर में पानी की व्यवस्था होने से समय की भारी बचत हो रही है और महिलाओं को दूर-दराज जाने की परेशानी से मुक्ति मिली है। गांव की प्राथमिक शाला की एक शिक्षिका ने बताया कि सभी घरों में पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंच रहा है।
वहीं, त्रिभौना की एक हितग्राही ने कहा कि अब कपड़े धोने और नहाने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। चिटकाकानी के एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि पहले कुएं से पानी लाने के लिए काफी दूर जाना पड़ता था, लेकिन नल से जल मिलने के बाद परिवार के सदस्यों और बच्चों को बड़ी राहत मिली है।
स्कूली बच्चों ने दिया संदेश, ग्रामीणों ने ली जल संरक्षण की शपथ
पेयजल आपूर्ति के साथ ही जल स्रोतों के संरक्षण पर भी जोर दिया गया। स्कूली बच्चों ने ‘जल है तो कल है’ और ‘जल बचाओ, जीवन बचाओ’ के नारों के साथ ग्रामीणों को जागरूक किया। इसके बाद ग्रामीणों ने पानी की हर बूंद का सदुपयोग करने, बर्बादी रोकने, स्थानीय जल स्रोतों की सुरक्षा करने और गांव की जल आपूर्ति योजना की समुचित देखभाल करने का संकल्प लिया।























