रायगढ़ (केलो प्रवाह)। कापू तहसील कार्यालय से इन्वर्टर चोरी केस में एक ट्विस्ट आया है। इससे केस 360 डिग्री घूम गया है। पुलिस ने जिस युवक राहुल टंडन को आरोपी बनाया था, उसने इन्वर्टर का बिल अदालत में प्रस्तुत किया है। सेशन कोर्ट से उसको अग्रिम जमानत भी मिल गई है। किसी सरकारी दफ्तर से कोई भी सामान की चोरी हो जाना बेहद गंभीर मामला है। कापू तहसील कार्यालय में इन्वर्टर लगाया गया था। 11 सितंबर को जब तहसीलदार कार्यालय पहुंचे तो बिजली गुल थी। लेकिन इन्वर्टर नहीं चल रहा था। स्टाफ ने बताया कि दो लोग आए और इन्वर्टर को उठा ले गए। पूछने पर दोनों ने राहुल टंडन का नाम लिया।
इस मामले में तहसीलदार ने कापू थाने में सूचना दी और राहुल टंडन नामक युवक के विरुद्ध नामजद शिकायत की। बवाल बढ़ा तो कुछ देर बाद दो अन्य व्यक्ति आए और इन्वर्टर वापस रख दिया। पुलिस ने राहुल व अन्य दो के खिलाफ बीएनएस की धारा 305 (ई), 332 (सी) और 3 (5) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया था। इस मामले में अब राहुल की ओर से ऐसे तथ्य पेश किए गए, जिससे केस में ट्विस्ट आ गया है। उसने पहले अग्रिम जमानत के लिए सेशंस कोर्ट में अर्जी लगाई थी। घरघोड़ा सेशन कोर्ट के न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने राहुल को अग्रिम जमानत दे दी है।
राहुल की ओर से इन्वर्टर का बिल प्रस्तुत किया गया है। आयुष ट्रेडर्स पत्थलगांव से इन्वर्टर खरीदी का बिल 13 अगस्त 2025 का है। इसके लिए 22 हजार रुपए का भुगतान किया गया है। राहुल टंडन का दावा है कि उसी ने तहसील कार्यालय में इन्वर्टर लगवाया था और जरूरत पडऩे पर निकाल ले गया।
पुलिस ने विवेचना में क्यों नहीं देखा बिल
तहसीलदार कापू ने थाने में इसकी लिखित शिकायत की थी। उन्होंने कर्मचारियों को धमकाने की शिकायत भी पुलिस से की थी। सवाल यह है कि पुलिस ने जब मामले की जांच की तब बिल सामने क्यों नहीं आया। बिल तो एक साल पहले का है। एफआईआर के पूर्व बिल प्रस्तुत किया जाता तो अपराध ही दर्ज नहीं होता। क्या जांच में कोई कमी रह गई?
























