रायगढ़। नीट अभ्यर्थी ने गले में जीआई तार लपेट कर दो मंजिला बिल्डिंग की छत से छलांग लगा कर खुदकुशी कर लेने का हृदयविदारक मामला सामने आया है। मृतक सारंगढ़ क्षेत्र का रहने वाला था जो रायपुर में किराये का मकान लेकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था। खुदकुशी करने से पहने उसने अपनी बहन से फोन पर बातचीत करते हुए पढ़ाई में दिक्कत होने की बात कही थी। माना जा रहा है कि पढ़ाई को लेकर वह मानसिक दबाव में था जिस वजह से ऐसा कठोर कदम उठाया है। राजधानी के पुरानी बस्ती पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार सारंगढ़ के परसकोल माल्दा निवासी करूणा सागर पटेल का पुत्र पुष्पेन्द्र पटेल विगत दो वर्ष से रायपुर में भाठागांव के अवधपुरी में किराये का मकान लेकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रहा था।
रविवार की सुबह छात्र की दो मंजीला इमारत पर फांसी लटकी लाश मिलने से आस पास क्षेत्र में हडक़ंप मच गई थी। मामले की सूचना पर पुरानी बस्ती थाना की टीम मौके पर पहुंची और शव को उतार कर अस्पातल भिजवाते हुए जांच पड़ताल शुरू की। बताया जा रहा है कि पुष्पेन्द्र गले मेें जीआई तार बांध कर बिल्डिंग से छलांग लगा दी थी जिस वजह से तार का फंदे में झुल कर उसकी मौत हो गई। वहीं पुलिस द्वारा उसके परिजनों को सूचना दी गई तथा परिजनों की उपस्थिति में शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस द्वारा की जा रही जांच में यह बात सामने आई कि बिती रात उसने अपनी बहन से फोन पर बातचीत करते हुए कहा था कि उसे पढ़ाई में काफी दिक्कत आ रही है तथा कुछ भी याद नहीं हो रहा है।
ऐसे में माना जा रहा है कि पढ़ाई ठीक से नहीं होने के कारण वह मानसिक दबाव में था और इसी वजह से उसने ऐसा कदम उठा लिया है। पुष्पेन्द्र को मोबाईल भी टूटा हुआ मिला है। पुलिस द्वारा मोबाईल की जांच के साथ ही आसपास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। पुष्पेंद्र की यह दुखद कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या परीक्षाओं का बोझ हमारे बच्चों के जीवन से ज्यादा कीमती हो गया है? नीट (NEET) या कोई भी अन्य प्रतियोगी परीक्षा महज एक पड़ाव है, जीवन का अंत नहीं। यदि आप या आपके आसपास कोई भी छात्र पढ़ाई के कारण तनाव, घबराहट या मानसिक दबाव महसूस कर रहा है, तो कृपया चुप्पी तोड़ें। अपने मन की बात दोस्तों, परिवार या विशेषज्ञों से साझा करें।
माता-पिता को भी चाहिए कि वे बच्चों पर केवल परिणामों के लिए दबाव न डालें, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। याद रखिए, असफलता सुधार का एक अवसर है, और हर समस्या का समाधान बातचीत से संभव है। आपका जीवन अमूल्य है, इसे किसी एक परीक्षा की भेंट न चढ़ने दें।























