रायगढ़। धान खरीदी में केवल बड़े किसान ही परेशान हो रहे हैं। पुराने प्रबंधकों और बिचौलियों को जो काम करना है, वो आसानी से कर रहे हैं। धान खरीदी में कड़ाई के बावजूद पिछले साल की तुलना ज्यादा धान खरीद लिया गया है। 33 केंद्र ऐसे हैं, जहां ज्यादा खरीदी हो गई है। इसमें खरसिया के उपार्जन केंद्रों की संख्या अधिक है। सरकार ने धान खरीदी को तिलिस्म बना दिया है। एक ओर 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी का ऐलान किया गया और अब अनावरी के हिसाब से किसी का 17 तो किसी का 18 क्विंटल के हिसाब से टोकन काटा जा रहा है। इतनी कड़ाई के बाद धान की आवक कम होनी चाहिए लेकिन इसका उल्टा हुआ है। 105 में से 33 केंद्र ऐसे हैं जहां पिछले साल से ज्यादा खरीदी हो चुकी है। कुछ तो ऐसे हैं जहां दोगुनी मात्रा में धान खरीदा जा चुका है।
जिले में 105 उपार्जन केंद्रों में धान खरीदा जा रहा है। प्रतिदिन खरीदी गई मात्रच की समीक्षा की जा रही है। इसके बावजूद 33 केंद्रों में प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर खरीदी कर ली गई। इसमें कुछ केंद्र ऐसे भी हैं जहां पिछले तीन सालों में गबन के कारण एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। उदाहरण के लिए छातामुड़ा केंद्र में 24-25 में 7964 क्विं. धान खरीदी की गई थी। लेकिन इस बार 10350 क्विं. क्रय किया जा चुका है। करीब डेढ़ गुना धान खरीदा जा चुका है। खरसिया के बड़े देवगांव में गत वर्ष इसी अवधि तक 3800 क्विं. धान खरीदी हुई थी जो इस बार 6838 क्विं. पहुंच चुका है जो तकरीबन दोगुना है। लैलूंगा के बगुडेगा में पिछले साल 8976 क्विं. धान उपार्जन हुआ था जो इस बार 15060 क्विं. हो गया है। ऐसे 33 केंद्र हैं जहां धान खरीदी का आंकड़ा असामान्य है। इसमें से कई दागी समितियां हैं।
खरसिया के 12 केंद्रों ने तोड़े रिकॉर्ड
33 केंद्रों में लैलूंगा का बगुडेगा और खरसिया के हालाहुली, बड़े देवगांव, तुरेकेला व तिउर शामिल हैं। इनका नाम पिछले सालों में फर्जी खरीदी में भी सामने आया था। तुरेकेला और हालाहुली में कई तरह की गड़बडिय़ां हो चुकी हैं जिन पर सहकारिता विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता। सांठगांठ करके प्रबंधक नियुक्त किए जाते हैं। बड़े देवगांव में भी जमकर हो रही खरीदी से नोडल अधिकारी पर सवाल उठ रहे हैं। खरसिया के 22 केंद्रों में से 12 में गत वर्ष की तुलना में ज्यादा खरीदी हो चुकी है।


























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