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21 क्विंटल नहीं, वास्तविक उपज के आधार पर होगी खरीदी

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  • रकबा समर्पित करने किसानों पर दबाव, सभी एसडीएम को भेजी धान उपार्जन की एसओपी

रायगढ़। धान खरीदी को लेकर दोहरी कार्यशैली देखी जा रही है। एक ओर कहा जा रहा है कि प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी होगी। दूसरी तरफ कहा गया है कि पिछले साल किसान ने जितना धान बेचा था, इस बार भी उतना ही खरीदा जाए। यही नहीं वास्तविक उपज के हिसाब से खरीदी हो। धान उपार्जन के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया बनाकर सभी एसडीएम को भेजी गई है। इसमें धान खरीदी को नियंत्रित करने के लिए बिंदुवार निर्देश दिए गए हैं। यह आधिकारिक आदेश नहीं है बल्कि अनौपचारिक रूप से पालन करने का आदेश है। पहला बिंदु कहता है कि किसान ने पिछले साल जितना धान बेचा था, उतनी ही खरीदी इस बार भी की जाए। यदि टोकन ज्यादा मात्रा का जारी हुआ है तो सत्यापन किया जाए।

इसके साथ ही प्रति एकड़ 21 क्विंटल को भी रीचेक करने कहा गया है। समितियों में 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर पर ही खरीदी की जा रही है जबकि वास्तविक उपज इतनी नहीं होती। इसलिए किसान के खेत की वास्तविक उपज के हिसाब से ही खरीदी की जाए। दस एकड़ से अधिक रकबा पंजीयन वाले किसानों के वास्तविक उपज का मौके पर सत्यापन कर रिपोर्ट दी जाए। सत्यापन के बाद जितनी उपज हो, उसी दर पर टोकन जारी किया जाए। उदाहरण के तौर पर दस एकड़ में फसल की वास्तविक पैदावार 18 क्विंटल निकले तो इस हिसाब से 180 क्विंटल का टोकन जारी होगा। वन अधिकार पट्टों का फिर से सत्यापन होगा। पहली बार धान बेचने वाले किसानों का टोकन सत्यापन कराने का निर्देश है। अति संवेदनशील और संवेदनशील समितियों में पूरे रकबे और उपज का सत्यापन कराना है। प्रतिदिन उपलब्ध टोकन का 10 प्रश पटवारियों और आरएईओ से वेरीफाई करना है।

उपार्जन केंद्रों में कितने गेट, सीसीटीवी भी नहीं
एसओपी के अनुसार धान लेकर आने वाली गाड़ियों का गेट पास कटेगा। सीसीटीवी ऐसी जगह लगाना है, जिससे एंट्री और एक्जिट प्वाइंट की निगरानी हो सके। कुछ केंद्रों में तीसरा गेट भी होता है, जिससे अवैध धान लाया जाता है। पिछले साल धरमजयगढ़ के खडग़ांव समिति में ऐसा ही हुआ था। दरअसल कार्रवाई का समय आते ही खुद अफसर बचाव की मुद्रा में आ जाते हैं। अब पूरा फोकस रकबा समर्पण पर हो गया है।

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