छोड़कर सामग्री पर जाएँ

दिसंबर में ये सब्ज़ी लगाएँ, प्रति एकड़ ₹3 लाख का नेट प्रॉफ़िट पक्का! खेत बन जाएगा एटीएम

29 08 2019 29ksm31 c 3 19530682 233610

क्या आप अपनी खेती से होने वाली आय को दोगुना करना चाहते हैं? किसान भाई अक्सर सवाल करते हैं कि इस समय (नवंबर-दिसंबर) कौन-सी सब्ज़ी लगाएँ जिससे उन्हें सबसे ज़्यादा मंडी भाव और सबसे अधिक आमदनी हो। इसका सीधा जवाब है: करेला (Bitter Gourd) की अगेती खेती!
दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक बुवाई करके, आप ठीक उस समय बाज़ार में पहुँचेंगे जब करेले की क़ीमतें आसमान छू रही होंगी। इस विधि से आप प्रति एकड़ ₹2 से ₹3 लाख का शुद्ध लाभ (खर्चा निकालकर) आसानी से कमा सकते हैं।
आइए जानते हैं, सर्दी में बंपर मुनाफ़ा देने के लिए करेले की खेती कैसे करें।

करेला ही क्यों? समझें मुनाफ़े का गणित
करेले की अगेती खेती में शानदार मुनाफ़ा मिलने के तीन मुख्य कारण हैं:

  • उत्तम मंडी भाव का समय: दिसंबर में बुवाई करने से आपकी फ़सल फरवरी से मार्च के बीच तैयार होगी। इस समय बाज़ार में सब्ज़ियों की आवक कम होती है, जिससे करेले का भाव ₹40 से ₹70 प्रति किलो तक मिल सकता है।
  • बंपर उत्पादन की संभावना: यदि आप सही वैज्ञानिक विधि अपनाते हैं, तो आप प्रति एकड़ 100 से 150 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
  • लाभ का आकलन: यदि आपको कम से कम ₹40 प्रति किलो का भाव और 100 क्विंटल का उत्पादन भी मिलता है, तो कुल आय ₹4,00,000 होगी। इसमें से सभी खर्चों को निकालकर, ₹2,00,000 से ₹3,00,000 तक का शुद्ध लाभ आसानी से हो सकता है।

सर्दी में करेले की खेती (दिसंबर): संपूर्ण मार्गदर्शन
अधिक उत्पादन और उच्च गुणवत्ता की फ़सल पाने के लिए नीचे दिए गए चरणों का ध्यान रखें।

    बुवाई का सही समय और तकनीक

      • अगेती बुवाई: अधिकतम मुनाफ़े के लिए, बुवाई दिसंबर के अंतिम सप्ताह से पहले पूरी कर लेनी चाहिए। फ़सल लगभग 55 से 60 दिन में तैयार हो जाती है।
      • जलवायु: करेला गर्म जलवायु में सबसे अच्छा फलता-फूलता है। जब फ़सल तैयार होगी, तब हल्की गर्म जलवायु इसके लिए बहुत लाभकारी होती है और बीमारियों का प्रकोप कम होता है।

      उपयुक्त मिट्टी एवं खेत की तैयारी

        • मिट्टी: बलुई-दोमट और दोमट मिट्टी करेले की खेती के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है।
        • जुताई और खाद: खेत की 3 से 4 बार अच्छी तरह से जुताई करें। जुताई से पहले, 5 से 6 ट्रॉली पुरानी गोबर की खाद प्रति एकड़ खेत में अच्छी तरह मिलाएँ।
        • रासायनिक खाद: गोबर की खाद के साथ-साथ मिट्टी की आवश्यकताओं के अनुसार डीएपी (DAP), यूरिया, और एमओपी (MOP) जैसे रासायनिक उर्वरकों का भी उचित मात्रा में प्रयोग करें।

        बेड तैयार करने की विधि
        पिछली जुताई के बाद मिट्टी को अच्छी तरह तैयार करके बेड बनाना शुरू करें:

          • बेड की दूरी: 6 फीट
          • बेड की चौड़ाई: 3 फीट
          • बेड की ऊँचाई: 1 से 1.5 फीट
          • बीजों की दूरी: 1 फीट की दूरी पर बुवाई करें।
          1. सर्वश्रेष्ठ वैरायटी का चुनाव
            अपनी क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के आधार पर उच्च उत्पादन देने वाली विश्वसनीय वैरायटी का चयन करें। लोकप्रिय वैरायटी में क्लाउज की अनुष्का, सिजेंटा की अस्मिता, सेमीनस की अभिषेक, VNR की नंदिता, और ईस्ट-वेस्ट की रिचा शामिल हैं।
          2. सर्दी से बचाव एवं मल्चिंग (Mulching)
            दिसंबर की सर्दी में फ़सल को बचाना उत्पादन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
          • प्लास्टिक मल्च का उपयोग: फ़सल को सर्दी से बचाने और मिट्टी का तापमान नियंत्रित रखने के लिए प्लास्टिक मल्च का उपयोग करें।
          • फ़ायदे: यह खरपतवार (Weeds) को भी उगने नहीं देती, जिससे मज़दूरी का खर्च कम होता है। 25 माइक्रोन की प्लास्टिक मल्च इसके लिए सबसे बेहतर मानी जाती है।

          दमदार पैदावार से पक्की आमदनी
          करेले की अगेती खेती में निवेश किए गए आपके समय और मेहनत का रिटर्न बहुत अधिक है। सही समय पर बुवाई, उच्च गुणवत्ता वाली वैरायटी और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग करके आप न केवल अपनी फ़सल को सर्दी से बचाते हैं, बल्कि उच्च मंडी भाव और दमदार पैदावार दोनों हासिल करते हैं। इस प्रकार, खेती के इस तरीके से किसान एक स्थायी और बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं।

          इस खबर को शेयर करें:

          8690517c9326392a68531b5faf7668b00e00b86685972a50e34c21832c7c1c6c?s=90&d=mm&r=g

          Editorial

          News Room

          छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से 1988 से निरंतर प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र 'केलो प्रवाह' का यह Official Digital News Room है। हमारी संपादकीय टीम देश और छत्तीसगढ़ की प्रमुख खबरों, सीएम की गतिविधियों और शासन की जनहितैषी योजनाओं को प्रमुखता से साझा करती है। किसानों के हित में समर्पित हमारी टीम, 'जल, जंगल और जमीन' से जुड़े संवेदनशील मुद्दों और विभिन्न विभागों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाली रिपोर्टिंग के साथ ही सुदूर अंचलों की ज़मीनी हकीकत को सामने लाती है। जनहित से जुड़ी गतिविधियों, खनिज और औद्योगिक क्षेत्रों की 'Exclusive' खबरों को Evidence के साथ प्रमाणिकता से प्रकाशित करना हमारी प्राथमिकता है। राजनीति, प्रशासन, अपराध, स्पोर्ट्स, रोज़गार, खेती-किसानी और धार्मिक विषयों सहित हर क्षेत्र की खबरों को पूरी शुचिता के साथ प्रस्तुत करना ही हमारा संकल्प है।

          Share: