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फेज थ्री के दो यूनिट के लिए 540 एकड़ जमीन लेगा NTPC लारा

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फ्लाईएश का उत्सर्जन होगा तीन गुना, क्षेत्र के विकास के लिए करेंगे ज्यादा काम

एनटीपीसी के प्रोजेक्ट हेड सुभाष ठाकुर ने ली प्रेसवार्ता

रायगढ़। एनटीपीसी लारा के हेड ऑफ प्रोजेक्ट सुभाष ठाकुर ने शुक्रवार को पत्रकारों से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने पावर प्लांट से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए। थर्ड स्टेज के विस्तार के बारे में उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके लिए अतिरिक्त 540 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। इसका अधिग्रहण किया जाएगा। एनटीपीसी लारा ने सामाजिक सोद्देश्यता के साथ उद्योग संचालन में संतुलन हमेशा बनाए रखा है। कंपनी ने न केवल प्रभावित गांवों में काम कराए हैं बल्कि पूरे प्रदेश में कई प्रोजेक्ट को सहायता दी है।

हेड ऑफ प्रोजेक्ट सुभाष ठाकुर ने शुक्रवार को पत्रकारों से चर्चा की। लारा प्लांट के विस्तार के संबंध में सवाल पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि अभी पहले चरण में निर्मित दो यूनिटों से 1600 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। दूसरे चरण के दो यूनिटों का निर्माण चल रहा है जिसके बाद क्षमता 3200 मेगावाट हो जाएगी। दूसरे चरण का काम 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद तीसरे चरण के लिए भी 1600 मेगावाट क्षमता विस्तार होगा। इसमें भी 800-800 मेगावाट के दो यूनिटों का निर्माण होगा। इसके बाद प्लांट की क्षमता 4800 मेगावाट हो जाएगी, जो देश में सबसे ज्यादा है।

दो चरणों के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं होगी लेकिन तीसरे चरण में करीब 540 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में हुए भू-अर्जन घोटाले की तरह दोबारा कोई स्कैम नहीं होगा। एश डाइक के लिए जमीन की जरूरत पड़ेगी क्योंकि छह यूनिटों से एश का उत्सर्जन अधिक होगा। उन्होंने कहा कि प्रदूषण कम करने के लिए एनटीपीसी गंभीरता से काम कर रहा है। इसके लिए ही एफजीडी की भी स्थापना की गई है जिसके बाद वायु प्रदूषण बहुत कम हो चुका है।

कम पानी खपत करता है एनटीपीसी

एनटीपीसी प्रबंधन की ओर से जानकारी दी गई कि देश में प्रति यूनिट बिजली उत्पादन के लिए सबसे कम पानी खपत की जाती है। साराडीह बैराज से 68 एमसीएम पानी सालाना लिया जाता है। एनटीपीसी लारा का प्लांट लोड फैक्टर पूरे देश में कंपनी के सभी संयंत्रों में सबसे कम है। साथ ही बिजली पैदा करने में अंदरुनी मशीनरी में खपत की गई बिजली भी लारा में सबसे कम है। यूनिट टू ने 487 दिन बिना रुके काम किया है जो एक रिकॉर्ड है।

युद्ध का ज्यादा असर नहीं

अभी युद्ध की वजह से पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति में समस्या है। इससे एनटीपीसी पर कितना असर होगा, इस सवाल पर एचओपी श्री ठाकुर ने बताया कि अभी कोई खास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि पहले से पर्याप्त भंडारित करके रखा गया है। तेल का भंडार पर्याप्त है। एचओपी श्री ठाकुर ने बताया कि प्रशासन से सामंजस्य बिठाते हुए काम किया जा रहा है। वर्तमान में केलो नदी, नालंदा परिसर, पीएम श्री विद्यालय के लिए सहायता दी गई है।

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Editorial

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