- दोनों कंपनियों ने एनजीएसएल के नाम से बनाया ज्वाइंट वेंचर, 24 दर्दनाक मौतों के बाद संयंत्र में छाया सन्नाटा
रायगढ़। सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हादसे की जांच में कई नए खुलासे होने बाकी हैं। हादसे की पूरी जिम्मेदारी वेदांता पावर पर डाली गई जबकि असली कडिय़ां जुडऩी बाकी हैं। प्लांट को वेदांता लिमिटेड ने 2022 में खरीदा। 2025 में इसे चलाने का ठेका एनजीएसएल को दे दिया गया। यह कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड और जनरल इलेक्ट्रिक का ज्वाइंट वेंचर है। 14 अप्रैल को वेदांता लिमिटेड छत्तीसगढ़ थर्मल पावर प्लांट सिंघीतराई में बॉयलर ट्यूब ब्लास्ट हो गया। चंद सेकंडों में ही 34 मजदूर गर्म भाप, राख और उच्च तापमान की चपेट में आ गए। अब तक 24 की मौत हो चुकी है।
बॉयलर इंस्पेक्टोरेट की जांच के अलावा बिलासपुर कमिश्नर भी जांच करेंगे। कलेक्टर ने भी मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। एफएसएल की टीम भी जांच कर चुकी है। पूरी तरह से तकनीकी नाकामी के कारण दुर्घटना हुई। पुलिस ने वेदांता पावर प्लांट के 18 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है लेकिन गिरफ्तारी किसी की नहीं हुई। इस हादसे में अब देश की दो दिग्गज कंपनियों का नाम उछला है। 2022 में संयंत्र खरीदने के बाद वेदांता लिमिटेड ने 2025 में प्लांट के ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस का काम आउटसोर्स किया।
एनटीपीसी लिमिटेड और जनरल इलेक्ट्रिक के ज्वाइंट वेंचर एनजीएसएल (एनटीपीसी जीई पावर सर्विसेस प्रालि) को प्लांट चलाने का टेंडर मिला था। जांच में अब तक वेदांता लिमिटेड को ही इसके लिए जिम्मेदार माना गया है। सवाल यह उठ रहे हैं कि एनजीएसएल ने पावर प्लांट की पुरानी मशीनरी का सेफ्टी ऑडिट कराया था या नहीं। बॉयलर मेंटेनेंस तभी होता है जब यह बंद हो। दिवालिया होने के बाद अथेना पावर प्लांट बंद भी रहा था। इस दौरान मशीनरी भी खराब हुई होगी। सीमलेस पाइप की क्वालिटी का परीक्षण भी नहीं किया गया था।
कौन-कौन हैं कंपनी के बोर्ड में
एनजीएसएल को एनटीपीसी और जीई ने मिलकर बनाया है। इसलिए दोनों कंपनियों के कुछ अधिकारी भी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हैं। हादसे में वेदांता लिमिटेड के निदेशक अनिल अग्रवाल के विरुद्ध एफआईआर हुई है तो एनजीएसएल को क्यों छोड़ दिया गया। एनजीएसएल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में रविंद्र कुमार, महेश केन्धे, डॉ. आलोक कुमार त्रिपाठी, बेनू पिल्लई, मधुसूदन कुलकर्णी और अरविंद बाबू हैं।
प्लांट में पसरा सन्नाटा, 24 मौतों का बोझ
वेदांता लिमिटेड के पावर प्लांट में छग का अब तक का सबसे भयावह औद्योगिक हादसा हुआ है। इसके बाद से प्रशासन ने प्लांट को सील कर दिया है। अपने सामने मजदूर साथियों की दर्दनाक मौत देखकर कई श्रमिक भाग गए। प्लांट में काम करने वाले सारे मजदूर अपने गांव चले गए हैं। प्लांट में कोई भी काम नहीं हो रहा है। सिंघीतराई गांव में करीब 500 मजदूर किराए के मकानों में रहते थे। एक-एक कमरे में दस-दस श्रमिक भी रह रहे थे। सभी अपने गांव जा चुके हैं।























