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सोसायटी को नहीं किया हैंडओवर, रेरा ने बिल्डरों को दिए नोटिस

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  • पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने के बाद भी आवंटियों को अधिकार नहीं, हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों में ज्यादा दिक्कतें

रायगढ़। कोई भी आवासीय या कमर्शियल प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद निकाय से पूर्णता प्रमाण पत्र मिलता है। इसके बाद संबंधित प्रोजेक्ट के आवंटियों की समिति बनाकर हैंडओवर करना होता है। लेकिन बिल्डर ऐसा नहीं करते। अभी भी ऐसी कई कॉलोनियां हैं जहां काम पूरा हो चुका है लेकिन सोसायटी को हैंडओवर नहीं हुआ है। रेरा ने ऐसे बिल्डरों को नोटिस दिया है जिसमें रायगढ़ के भी करीब 30 बिल्डर हैं।

रेरा ने उन आवासीय और व्यावसायिक

परियोजनाओं के बिल्डरों पूर्ण करने के बाद भी स्थानीय रहवासियों को प्रबंधन का हस्तांतरण नहीं करने पर प्रदेश के करीब 600 बिल्डरों को नोटिस जारी किया है। इन बिल्डरों में रायगढ़ के कई बिल्डर शामिल हैं। रेरा ने शिकायत के बाद न सिर्फ निजी बिल्डरों को, बल्कि हाउसिंग बोर्ड और नगर निगम को भी नोटिस जारी किया है। इनके क्षेत्राधिकार में कई प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं। प्लॉट या मकान खरीदारों ने पजेशन लेकर रहना भी शुरू कर दिया है। निकाय से पूर्णता प्रमाण पत्र भी मिल चुका है। लेकिन परियोजनाओं के पूरा होने के बावजूद कॉलोनी की सोसायटी बनाकर आधिपत्य नहीं सौंपा है।

नियम यह है कि आवासीय व व्यावसायिक परियोजना के पूरा होने पर नगर निगम से पूर्णता प्रमाण पत्र हासिल करने के बाद बिल्डरों को सामान्य क्षेत्र, सुविधाओं और प्रबंधन का हस्तांतरण आवंटियों की समिति अथवा संघ को करना जरूरी है। कई बिल्डर ऐसा नहीं कर रहे हैं और स्वयं ही मेंटनेंस शुल्क ले रहे हैं। रेरा ने रायपुर, रायगढ़, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा सहित अन्य जिलों के 595 बिल्डरों को नोटिस जारी किया है। ऐसी 989 आवासीय एवं व्यावसायिक परियोजनाओं को पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने के बाद भी कॉलोनी का प्रबंधन समिति को नहीं दिया गया है।

समिति का करना है गठन

परियोजना पूर्ण होने के बाद बिल्डरों को आवंटियों की समिति या संघ का गठन करवाकर प्रोजेक्ट को हैंडओवर करना है। कॉलोनी का मेंटेनेंस यही समिति करेगी। बिल्डरों ने अभी भी ऐसी कॉलोनियों का अधिकार अपने पास रखा है। मेंटेनेंस भी वे खुद ही ले रहे हैं। सीजी रेरा ने कहा है कि अधिनियम के तहत केवल प्रमोटर ही नहीं, बल्कि आवंटियों की भी जिम्मेदारियां निर्धारित हैं। धारा 19(9) के अनुसार प्रत्येक आबंटी का दायित्व है कि वह आवंटियों की समिति, संघ अथवा सहकारी समिति के गठन में सक्रिय सहयोग करे। प्राधिकरण ने संबंधित कॉलोनाइजरों और बिल्डरों को 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जवाब नहीं मिलने पर उनके विरुद्ध अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों में अंधेर

इस सूची में हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियां भी शामिल हैं। दरअसल रेरा एक्ट लागू होने के बाद इसके नियमों का पालन हाउसिंग बोर्ड को भी करना है, लेकिन हाउसिंग बोर्ड कोई भी आवासीय परिसर बनाने के बाद समिति का गठन नहीं करता। बल्कि संबंधित नगरीय निकाय को हैंडओवर कर देता है। ग्रामीण क्षेत्र में कॉलोनी बनती है तो वहां कोई जवाबदेह नहीं होता। एक बार निर्माण के बाद बोर्ड उस प्रोजेक्ट से मुंह फेर लेता है। मेंटेनेंस नहीं होने के कारण कई हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों में अव्यवस्था है। 

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आशीष शर्मा

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