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न रुपए वापस किए, न दर्ज हुई FIR, नंदराम लहरे गायब!

Now the copy of FIR will be available in 23 languages

रायगढ़, (केलो प्रवाह)। राज्यसभा सांसद मद से मिले एक करोड़ रुपए की लागत से विकास कार्य किए जाने थे लेकिन सारंगढ़ के शातिर ठेकेदार नंदराम लहरे ने बिना काम किए ही राशि निकाल ली। प्रशासन ने 94 लाख रुपए शासन के खाते में जमा करने का नोटिस दिया था लेकिन अब तक न तो ठेकेदार का पता है और न ही एफआईआर दर्ज की जा सकी है। मनरेगा में तीन करोड़ का घपला करने वाले ने नंदराम लहरे 12 साल बाद तगड़ी वापसी की है। इस बार सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास मद में सेंधमारी कर ली। बिना काम किए ही जनपद पंचायत को बायपास करके रकम का आहरण कर ली।

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी ने 2020 से अप्रैल 2026 तक कार्यकाल के दौरान रायगढ़ जिले में भी काम अनुशंसित किए थे। रायगढ़ जिले में कोसीर सारंगढ़ के फर्म महावीर ट्रेडर्स कोसीर संचालक नंदराम लहरे ने ग्राम एकताल, ग्राम धनुआरडेरा और मिड़मिड़ा में सीसी रोड और सोलर स्ट्रीट लाइट के 11 कामों की मंजूरी ली। कुल 99 लाख के कामों के लिए भुगतान हो चुका है। जिला योजना सांख्यिकी से करीब 90 प्रश राशि आहरित की जा चुकी है।

वर्ष 23-24 में ये कार्य स्वीकृत किए गए थे। नियमों के तहत सांख्यिकी विभाग से काम की स्वीकृति की फाइल निर्माण एजेंसी जनपद पंचायत पुसौर को भेजी जानी थी। वहां से वर्क ऑर्डर, प्लान आदि फाइनल होने के बाद काम शुरू किया जाना था लेकिन ठेकेदार ने ऐसी सेटिंग की कि सीधे रकम ही आहरित कर ली। काम नहीं हुआ तो इसकी शिकायत हुई। जांच के बाद कलेक्टर ने ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

मनरेगा की राशि भी नहीं वसूल पाए

कलेक्टर ने इस मामले में जांच के आदेश दिए थे। गड़बड़ी प्रमाणित होने के बाद ठेकेदार नंदराम लहरे को नोटिस दिया गया था। नंदराम लहरे ने 2021 में पड़िगांव में भी ऐसा ही किया था। कोसीर में मनरेगा घोटाले की रकम भी गबन कर ली। इसके बाद दिमाग लगाकर इसी तरह दूसरे मदों में सेंध लगाई।

राशि भी जमा नहीं की

यह घपला सामने आए हुए पांच महीने हो चुके हैं। कलेक्टर ने जिला योजना सांख्यिकी विभाग को राशि रिकवरी या एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। पुसौर जनपद से कार्यों की रिपोर्ट लेकर वेंडर को नोटिस दिया गया। नंदराम लहरे ने एक महीने में पूरा करने का आश्वासन दिया था। ऐसा करते-करते कई महीने गुजर चुके हैं। कलेक्टर ने कार्यों को निरस्त कर राशि शासन के खाते में जमा कराने और एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।

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