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न अतिक्रमण रुका, न रिकॉर्ड दुरुस्त हुए, बाहरी लोगों ने कब्जाई जलाशय की जमीन

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  • उच्चभिट्ठी में कोकड़ीतराई जलाशय का रकबा हो रहा कम, डुबान वाली जमीन पर बन रहे मकान, बस्ती बस गई लेकिन किसी ने रोका नहीं

रायगढ़। अवैध कब्जा कराने वालों ने कोकड़ीतराई जलाशय की जमीन पर बस्ती बसा ली है। बाहर से रायगढ़ आए परिवारों को रुपए लेकर जमीन पर मकान बनाने की अनुमति दी गई। किस भूमाफिया ने ऐसा किया है, इसकी जांच भी प्रशासन नहीं कर रहा है। रायगढ़ जिले का मतलब केवल रायगढ़ शहर हो गया है। कोकड़ीतराई जलाशय के लिए जमीन का अधिग्रहण 1978 में हो चुका है। चार गांवों की करीब 73 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया था। अधिग्रहित भूमि को भी शासन बचाने में नाकाम रहा। जल संसाधन विभाग के इस प्रोजेक्ट के लिए कोकड़ीतराई के 12 किसानों की 1.549 हे., चिराईपानी की 9 किसानों की 6.880 हे., उच्चभिट्ठी की 46 किसानों की 31.171 हे. और परसदा के 41 किसानों की 32.858 हे. कुल 72.455 हे. भूमि का अधिग्रहण किया था। 351 खसरा नंबरों की जमीन का अर्जन हुआ था।

राजस्व विभाग को सभी खसरा नंबरों को जल संसाधन विभाग के नाम पर चढ़ाते हुए अतिक्रमण को रोकना था। स्थानीय जनप्रतिनिधि भी अतिक्रमण रोकलने के बजाय इसे बढ़ावा देने में जुटे रहे। 50 से ज्यादा खसरा नंबरों को जल संसाधन विभाग के नाम पर नहीं चढ़ाया गया। इस जमीन पर पुराने मालिकों ने राखड़ पाटकर दूसरे लोगों को बेच दिया। उच्चभिट्ठी ग्राम पंचायत की ओर से जलाशय की ओर अतिक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। आसपास के उद्योगों से हजारों टन फ्लाई एश लाकर डाला गया। तब भी राजस्व विभाग ने इसकी रिपोर्ट नहीं दी। पटवारी और आरआई को सब कुछ मालूम होते हुए भी इसकी सूचना नहीं दी गई। 

बस्ती बस गई, किसी को खबर नहीं

कोकड़ीतराई जलाशय का वो भाग जो उच्चभिट्ठी पंचायत से लगा है, वहीं अतिक्रमण हो रहा है। राखड़ अभी भी पाटा जा रहा है। एक पूरी बस्ती इस पर बसाई जा चुकी है। कुछ महीने पहले एसडीओ जल संसाधन ने रिकॉर्ड दुरुस्त करने के लिए पत्राचार किया था। जो जमीन बिक चुकी है, उस पर विभाग को कैसे आधिपत्य मिलेगा। अभी भी अवैध कब्जे हो रहे हैं।

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Editorial

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