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ममता बनर्जी का इस्तीफा से इनकार! बंगाल में शुरू हुआ ‘दीदी’ का खेला.. जानिए अब क्या होगा

BANGALCMMAMTA

न्यूज डेस्क। क्या कोई मुख्यमंत्री चुनाव हारने के बाद भी अपनी कुर्सी पर डटा रह सकता है? पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद उठे इस सवाल ने देश के संविधान विशेषज्ञों को भी चकरा दिया है। 2026 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिली 206 सीटों की प्रचंड जीत के बावजूद सत्ता का हस्तांतरण एक गहरे संकट में फंसता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों को ‘संवैधानिक डकैती’ करार देते हुए फिलहाल इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे राज्य में एक अभूतपूर्व राजनीतिक गतिरोध पैदा हो गया है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि संसदीय लोकतंत्र में मुख्यमंत्री का इस्तीफा महज एक औपचारिक प्रक्रिया है, क्योंकि शासन करने की असली शक्ति सदन के बहुमत में निहित होती है न कि किसी व्यक्ति विशेष की इच्छा पर।

संवैधानिक और कानूनी ढांचे के अनुसार, जैसे ही चुनाव परिणाम घोषित होते हैं और नई विधानसभा के गठन की अधिसूचना जारी होती है, पुरानी कैबिनेट का वैधानिक आधार स्वतः ही समाप्त प्राय हो जाता है। संविधान के अनुच्छेद 172 (1) की व्याख्या करते हुए जानकारों का कहना है कि विधानसभा का पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होते ही मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल की शक्तियां कानूनी रूप से शून्य हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में यदि कोई निवर्तमान मुख्यमंत्री पद छोड़ने में आनाकानी करता है, तो राज्यपाल के पास अनुच्छेद 164 के तहत दी गई शक्तियों का उपयोग करते हुए मुख्यमंत्री को बर्खास्त करने और बहुमत प्राप्त दल के नेता को शपथ दिलाने का पूरा अधिकार सुरक्षित है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह रुख केवल एक रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश हो सकता है ताकि वे चुनावी विसंगतियों पर अपना पक्ष मजबूती से रख सकें, लेकिन यह कानूनी रूप से नई सरकार के गठन को लंबे समय तक नहीं रोक पाएगा। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं और राज्यसभा के पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यदि इस राजनीतिक खींचतान के कारण राज्य की कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है, तो केंद्र सरकार के पास अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने का विकल्प भी खुला रहता है।

वर्तमान में राजभवन की सक्रियता और कोलकाता में सुरक्षा बलों की बढ़ती तैनाती यह संकेत दे रही है कि संवैधानिक मशीनरी को किसी भी कीमत पर ठप नहीं होने दिया जाएगा और बहुमत के आधार पर सत्ता का परिवर्तन सुनिश्चित किया जाएगा।

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विकास पाण्डेय

एडिटर - वेब एवं डिजिटल

विकास पाण्डेय अक्टूबर 2021 से 'केलो प्रवाह' के साथ जुड़े हैं और डिजिटल विंग के संचालन एवं संपादन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रायगढ़ और छत्तीसगढ़ के प्रमुख घटनाक्रम, जनहित के मुद्दों और स्थानीय सरोकारों पर रिपोर्टिंग करते हैं। उन्होंने RIG24 मीडिया नेटवर्क से पत्रकारिता की शुरुआत की और इसी दौरान BJMC की डिग्री हासिल की।

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