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​चेहरे तो छोड़िए, फिंगरप्रिंट और रेटिना भी सेम! जब रामपुर की जुड़वां बहनों के आगे फेल हुआ आधार का बायोमेट्रिक सिस्टम, पढ़ें अनोखी कहानी

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रामपुर। जिले के सेंट मैरी स्कूल में कक्षा 10 में पढ़ने वाली दो जुड़वां बहनों खिज़रा और तूबा जुबैर के फिंगरप्रिंट और आंखों का रेटिना एक जैसा होने की वजह से उनका आधार अपडेट अटक गया। एक बहन का डेटा दर्ज होते ही सिस्टम दूसरी बहन के आवेदन को डुप्लीकेट मानकर खारिज कर देता था। करीब तीन महीने की प्रक्रिया और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के विशेष समन्वय के बाद अब दोनों बहनों के आधार कार्ड अलग-अलग अपडेट कर दिए गए हैं।

जुबेर इलियास की बेटियां खिज़रा और तूबा के आधार कार्ड बचपन में माता-पिता की पहचान के आधार पर बने थे। अब 10वीं बोर्ड परीक्षा के रजिस्ट्रेशन के लिए उन्हें बायोमेट्रिक अपडेट कराना जरूरी था। जब वे आधार केंद्र पहुंचीं, तो दोनों के फिंगरप्रिंट और रेटिना स्कैन में 100 प्रतिशत समानता पाई गई। इस तकनीकी अड़चन की वजह से महीनों तक उनका आवेदन खारिज होता रहा और बोर्ड परीक्षा के पंजीकरण पर संकट मंडराने लगा।

मोबाइल के फेस लॉक से हुआ था असामान्य समानता का अहसास

इस बायोमेट्रिक समानता का पता परिवार को पहले ही एक घरेलू घटना से चला था। खिज़रा के मुताबिक, उनके पिता ने एक बार उनके चेहरे से मोबाइल का फेस लॉक सेट किया, लेकिन जब तूबा ने फोन के सामने चेहरा किया तो वह तुरंत अनलॉक हो गया। इसके बाद जब तूबा के चेहरे से फोन लॉक किया गया, तब खिज़रा का चेहरा दिखाने पर भी लॉक खुल गया। इस घटना के बाद परिजनों को समझ आया कि दोनों के चेहरे और आंखों की बनावट में असाधारण समानता है।

जिला प्रशासन और यूआईडीएआई के प्रयास से बनी बात

आधार केंद्रों से निराशा हाथ लगने के बाद छात्राओं के चाचा मकसूद अहमद परिजनों के साथ रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी से मिले। जिलाधिकारी ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए यूआईडीएआई के दिल्ली और लखनऊ मुख्यालयों से संपर्क साधा। विशेष तकनीकी समन्वय के तहत दोनों बहनों के पुराने रिकॉर्ड में बदलाव कर नए सिरे से अलग-अलग बायोमेट्रिक दर्ज किए गए।

जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ बताया। उन्होंने कहा कि आमतौर पर जुड़वां बच्चों के रेटिना या फिंगरप्रिंट में थोड़ा अंतर जरूर होता है, लेकिन इस मामले में बायोमेट्रिक डेटा पूरी तरह मैच कर रहा था। यूआईडीएआई के विशेष प्रयासों से दोनों के अलग कार्ड जारी होने के बाद अब छात्राओं के 10वीं बोर्ड परीक्षा के रजिस्ट्रेशन का रास्ता साफ हो गया है।

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