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पारंपरिक फसल छोड़कर अपनाई करेले की आधुनिक खेती, किसान दीपक को हुआ 2.95 लाख रुपये का शुद्ध लाभ

Kisandipak

रायपुर, 08 जून 2026। करेले की आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान कम लागत में लाखों रुपये का मुनाफा कमा सकते हैं। आधुनिक तकनीकों (जैसे ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और मचान विधि) के प्रयोग से करेले की पैदावार कई गुना बढ़ जाती है और फलों की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है।
छत्तीसगढ़ के किसान अब पारंपरिक ढर्रे से बाहर निकलकर आधुनिक और व्यावसायिक खेती के जरिए अपनी तकदीर बदल रहे हैं। ऐसी ही एक मिसाल महासमुंद जिले के विकासखंड बसना के अंतर्गत ग्राम बंसुलीडीह के प्रगतिशील किसान दीपक ने पेश की है। स्नातकोत्तर शिक्षित दीपक ने लीक से हटकर उद्यानिकी फसल को अपनाया, जिससे उनकी आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत सब्जी क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम के तहत करेले की फसल का उत्पादन शुरू किया और आज वे क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए रोल मॉडल बन गए हैं।

धान की तुलना में 7 गुना से अधिक मुनाफा
किसान दीपक बताते हैं कि पहले वे अपनी 1.00 हेक्टेयर सिंचित भूमि पर पारंपरिक रूप से धान की खेती करते थे। धान से उन्हें सालभर में महज 42 हजार 300 रुपये का ही शुद्ध लाभ मिल पाता था। लेकिन उद्यानिकी विभाग की योजनाओं से प्रेरित होकर जब उन्होंने करेले की खेती चुनी, तो उनकी किस्मत बदल गई। इस बार उन्हें इस फसल से लगभग 2.95 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है, जो धान के मुकाबले 7 गुना से भी अधिक है।

आधुनिक कृषि तकनीकों ने बढ़ाई फसल की गुणवत्ता
दीपक की इस सफलता के पीछे वैज्ञानिक और आधुनिक तौर-तरीके रहे हैं। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी खेती में ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग तकनीक और आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग किया। इन नवीन तकनीकों के प्रयोग से न केवल पानी की बचत हुई, बल्कि फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी भारी उछाल आया। उन्हें प्रति एकड़ लगभग 18 टन करेले का बंपर उत्पादन मिला।

ओडिशा के बाजारों तक पहुंची महासमुंद के करेले की धमक
बेहतर क्वालिटी के कारण दीपक को बाजार में करेले का औसतन 30 रुपये प्रति किलोग्राम का शानदार भाव मिला। उन्होंने अपनी उपज को स्थानीय सरायपाली मंडी के साथ-साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा के बड़े बाजारों में भी बेचा, जहां इसकी भारी मांग रही। प्रगतिशील किसान दीपक ने बताया कि उद्यानिकी खेती अपनाने से मेरी आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी सुधार हुआ है। बढ़ी हुई आय से मेरे परिवार का जीवन स्तर काफी बेहतर हुआ है। मैं लगातार उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के संपर्क में रहता हूं ताकि नई सरकारी योजनाओं और तकनीकों का लाभ उठा सकूं।

आसपास के गांवों में बढ़ी उद्यानिकी फसलों की होड़
दीपक की इस बड़ी कामयाबी को देखकर ग्राम बंसुलीडीह सहित आसपास के इलाकों के अनेक किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर उद्यानिकी फसलों (सब्जी और फल उत्पादन) की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। विभाग का मानना है कि ऐसी सफलताएं जिले में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होंगी।

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विकास पाण्डेय

एडिटर - वेब एवं डिजिटल

विकास पाण्डेय अक्टूबर 2021 से 'केलो प्रवाह' के साथ जुड़े हैं और डिजिटल विंग के संचालन एवं संपादन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रायगढ़ और छत्तीसगढ़ के प्रमुख घटनाक्रम, जनहित के मुद्दों और स्थानीय सरोकारों पर रिपोर्टिंग करते हैं। उन्होंने RIG24 मीडिया नेटवर्क से पत्रकारिता की शुरुआत की और इसी दौरान BJMC की डिग्री हासिल की।

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