रायगढ़, (केलो प्रवाह)। रायगढ़ जिले में विकास और नियमों के लिए केवल रायगढ़ शहर ही है। सारे कानून-कायदे यहीं चलते हैं। खरसिया में कोई नियम नहीं चलता। इसीलिए प्रशासन ने भी खरसिया को ऑटो मोड में डाल रखा है। अवैध प्लॉटिंग के मामले में खरसिया सबसे आगे है। यहां हर कोने में एक नई कॉलोनी आकार लेने को तैयार है। नगर पालिका से चुटकियों में अनुमति मिल जाती है। रेरा अनुमति की कोई जरूरत ही नहीं। खरसिया शहर भी तेजी से बढ़ रहा है। कई कॉलोनाइजरों ने प्राइवेट कॉलोनी के लिए प्लॉट काटकर बेचे हैं। बिना रेरा पंजीयन के एक के बाद एक कॉलोनियां बसाई जा रही हैं। शहर के कई बड़े कारोबारी इसमें लगे हुए हैं। पिछले दिनों कलेक्टर ने बिना ईडब्ल्यूएस भूमि के कॉलोनी विकास पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
ऐसा लगता है कि इस नियम का पालन केवल रायगढ़ ब्लॉक के ही बिल्डरों को करना पड़ रहा है। खरसिया में कई जगहों पर प्लॉट काटकर बेचे गए हैं। दरअसल खरसिया में कोई भी बिल्डर ईडब्ल्यूएस के लिए जमीन नहीं देना चाहता। इसीलिए बिना अनुमति के कॉलोनियां बसाई जा रही हैं। रेरा वेबसाइट पर देखें तो हकीकत सामने आ जाती है। एक्ट लागू होने के बाद से अब तक खरसिया में केवल तीन आवासीय प्रोजेक्ट का पंजीयन हुआ है। इसमें से दो तो हाउसिंग बोर्ड के हैं। तीसरा प्रोजेक्ट तिरुपति बिल्डर्स का है जो 2021 में पूरा हो चुका है। मतलब यहां कोई रेरा एप्रुव्ड कॉलोनी नहीं बसाई गई। जो भी प्लॉट बेचे गए, अवैध कॉलोनियों के थे। नपा का होना, न होना एक समान
नगर पालिका खरसिया को शहर के अंदर कॉलोनी विकास अनुमति देने का अधिकार है। अवैध प्लॉटिंग पर एसडीएम और तहसीलदार कार्रवाई कर सकते हैं। यह सब कागजों में है। नपा क्षेत्र में कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। जो भी अपनी जमीन पर प्लॉट काटना चाहता है, उसको नपा से अघोषित अनुमति है। बिक्री नकल देने में पटवारी देर नहीं करते। यही कारण है कि खरसिया में सरकार को ईडब्ल्यूएस जमीन नहीं मिलती।























