- नागरामुड़ा में अंधाधुंध कटाई, ग्रामसभा प्रस्ताव भी जाली, शिकायत के बाद भी नहीं सुन रहा प्रशासन
रायगढ़, 4 दिसंबर। रायगढ़ जिले में धीरे-धीरे आधी वन भूमि कोयला खदानों और प्लांटों को दी जा चुकी है। बचे हुए जंगल को बचाने के लिए भी कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं। कंपनियों ने जंगलों को हड़पने के लिए ग्रामसभा के फर्जी प्रस्ताव भी प्रस्तुत कर दिए। इसकी शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने आंख-कान बंद कर दिए हैं। मामला नागरामुड़ा में जेएसपीएल द्वारा की जा रही अवैध कटाई का है।
जेएसपीएल को तमनार में गारे पेलमा 4/1 कोल ब्लॉक दोबारा आवंटित हुआ है। इसके विस्तार के लिए नागरामुड़ा में 95 हेक्टेयर वन भूमि भी हड़प ली गई है। ग्रामीणों ने शिकायत की है कि 27 नवंबर को जेएसीएल ने इस वन भूमि में अंधाधुंध कटाई शुरू की है। बस्ती से 200 मीटर दूरी पर स्थित जंगल को साफ कर दिया जा रहा है। जंगल कट जाने से प्रदूषण का स्तर बहुत तेजी से बढ़ेगा। इस भूमि पर खनन के लिए प्रस्तुत ग्रामसभा प्रस्ताव पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जेएसपीएल ने 30 सितंबर 2007 को ग्रामसभा का प्रस्ताव एसडीएम घरघोड़ा के समक्ष प्रस्तुत किया। इस प्रस्ताव पर तत्कालीन सरपंच ने ही सवाल उठाए हैं। पूर्व सरपंच अमलतास राठिया का कहना है कि वह ग्राम पंचायत जांजगीर में 2005 से 2009 तक पदस्थ रहा। 30 सितंबर 2007 को ऐसा कोई प्रस्ताव पारित ही नहीं किया गया है जिसमें जेएसपीएल को वन भूमि में कटाई की अनुमति दी गई हो। ग्राम पंचायत क्षेत्र की अतिरिक्त भूमि के प्रस्ताव का गलत अर्थ निकालकर सौ एकड़ जंगल को काटा जा रहा है। इसका विरोध किया जा रहा है लेकिन एसडीएम, तहसीलदार कोई नहीं सुन रहा है।
आपत्ति जताने के बावजूद काट रहे जंगल
प्रशासन अब ग्रामीणों का रह नहीं गया है। यह केवल बड़ी कंपनियों और अमीरों के हिसाब से चलता है। जनपद पंचायत तमनार में 23 सितंबर 2022 को प्रस्ताव पारित किया गया था। ग्राम पंचायत सरसमाल और जांजगीर में वन भूमि से जुड़ा क्लीयरेंस 2017 में रद्द किया गया था। इसमें जांजगीर की 273 हे. भूमि भी है। ग्रामसभा जांजगीर में 21 अक्टूबर 2018 को प्रस्ताव पारित किया गया था जिसके तहत अनापत्ति नहीं देने का निर्णय लिया गया था। इस संबंध में जनपद सीईओ ने जिला पंचायत सीईओ को सूचित भी किया था।





















