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रायगढ़ कोर्ट का बड़ा फैसला: नाबालिग की मजबूरी का उठाया फायदा, चाकू की नोक पर करता रहा दुष्कर्म, अब 20 साल सलाखों के पीछे काटेगा ‘शिशुपाल’

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रायगढ़। नाबालिग को डरा धमका कर उसके गांव का ही युवक दो वर्षों तक लगातार दुष्कर्म करता रहा। किशोरी ने युवक के परिजनों को भी इसकी जानकारी देते हुए उससे पीछा छुड़वाने की गुहार लगाई परंतु नतीजा सिफर ही रहा। इस पर पीडि़ता ने चक्रधरनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया था। उभयपक्ष की सुनवाई केे बाद कोर्ट ने युवक को दोषी करार देते हुए उसे 20 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 6 हजार रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। मिली जानकारी के अनुसार चक्रधरनगर थाना क्षेत्र के ग्राम भिखारीमाल निवासी नाबालिग किशोरी के माता-पिता का देहांत हो चुका है, जिसकी वजह से वह अपनी बूढ़ी दादी के साथ रहती है।

11 जनवरी 2024 के दो वर्ष पूर्व किशोरी रात को तकरीबन 9 बजे दिशा मैदान के लिए निकली थी तब गांव का ही युवक शिशुपाल सेठ ने खेत में उसे चाकू दिखाते हुए जान से मार देने की धमकी देकर अनाचार किया। वहीं यह बात किसी को नहीं बताने को कहा। इससे किशोरी काफी डर गई थी और भय से उसने घटना के विषय में किसी को नहीं बताया। इस बात का फायदा उठाते हुए शिशुपाल जब मन करता था तब किशोरी को बुलाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने लगा। तकरीबन दो वर्षों तक किशोरी उसके सितम सहती रही। वहीं एक  दिन हिम्मत कर उसने शिशुपाल के माता-पिता और उसके बड़े भाई से इस बात की शिकायत करते हुए उससे पीछा छुड़वाने की गुहार लगाई, लेकिन शिशुपाल के परिजनों ने उसकी बात को अनसुनी कर दिया। वहीं 11 जनवरी 2024 को एक बार फिर शिशुपाल ने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। आखिरकार पीडि़ता ने थाने की शरण ली।

पीडि़ता ने शिशुपाल के विरूद्ध चक्रधर नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वहीं किशोरी की रिपोर्ट पर जांच उपरांत पुलिस ने आरोपी शिशुपाल सेठ के विरूद्ध भादवि की धारा 376 (2) (ढ), 506 बी व पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर उसे गिरफ्तार करते हुए अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एफ. टी. एस. टी (पॉक्सो) देवेन्द्र साहू ने आरोपी शिशुपाल सेठ पिता संतराम सेठ निवासी भिखारीमाल को दोषी करार देते हुए भादंवि की धारा 506 बी के अपराध के लिए एक वर्ष के सश्रम कारावास व एक हजार रूपए का अर्थदण्ड तथा भादवि की धारा 376 (2)(ढ) व पॉक्सो एक्ट के अपराध के लिए 20 वर्ष सश्रम कारावास एवं 5 हजार रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। उक्त प्रकरण में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक मोहन सिंह ठाकुर ने पैरवी की है। 

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