- 48 हेक्टेयर के क्लस्टर में पांच क्रशरों को अनुमति देने के लिए कुछ भी करेंगे अधिकारी, जल संसाधन विभाग ने नहीं की एक बार भी जांच
रायगढ़। जिन गांवों में समस्याएं हैं, वहां इसे कम करने के बजाय बढ़ाने के लिए प्रशासन काम कर रहा है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला प्रशासन बेपटरी हो चुका है। डोलोमाइट खनन से प्रभावित क्षेत्र में मिट्टी, जल स्रोत के अलावा पेयजल की गुणवत्ता भी खराब हो चुकी है। टीडीएस लेवल 500 के पार है। अपनी ईआईए रिपोर्ट में क्रशर संचालक कहते हैं कि वे भूजल दोहन नहीं करेंगे, लेकिन पहले से यहां बोरवेल किए जा चुके हैं। कटंगपाली, जोतपुर, छैलफोरा, नौघटा क्षेत्र की बदहाली पर कोई अफसर नहीं सोचता बल्कि क्रशर मालिकों के साथ मिलकर इलाके को बदतर बनाने पर काम चल रहा है। 48 हेक्टेयर का डोलोमाइट क्लस्टर चिह्नित किया गया है जिसके अंदर पांच नई खदानों को अनुमति दी जा रही है।
घरों तक पहुंची खदानें, अवैध उत्खनन छिपाने का खेल
इस क्षेत्र में खदानों की वजह से सबसे बड़ा असर वाटर लेवल पर पड़ा है। घरों के किनारों तक खदानें पहुंच चुकी हैं। अब यहां फ्लाई एश पाटकर पुरानी अवैध खदानों को छिपाया जा रहा है। अब 35 एकड़ के पैच में चार क्रशरों को लीज दी जा रही है। रेवड़ी की तरह डोलोमाइट के पट्टे दिए जा रहे हैं। इसका नुकसान सबसे पहले भू-जल स्तर पर हो रहा है। यहां जल स्तर तेजी से नीचे गिरता जा रहा है। खनन के कारण पानी का संतुलन बिगड़ गया है। संदेहास्पद ईआईए रिपोर्ट के मुताबिक भी देखें तो वायु में पीएम 10 की मात्रा 71 म्यू ग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 2.5 33 म्यू ग्राम प्रति घन मीटर हो गया है। पर्यावरण विभाग के आंकड़े इससे कहीं अधिक होंगे। ग्राउंड वाटर की रिपोर्ट में टीडीएस 547 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच चुका है जो 300 से कम होना चाहिए। मतलब इस क्षेत्र का पानी बिना आरओ के नहीं पिया जा सकता। पानी की कठोरता भी 300 एमजी से अधिक है।
नहीं लगे हैं एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम
पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी है कि खनन व क्रशर प्रभावित क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की निगरानी के लिए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए। कटंगपाली, साल्हेओना, जोतपुर, टिमरलगा, गुड़ेली में मॉनिटरिंग सिस्टम इसीलिए नहीं लगाया गया क्योंकि यहां प्रदूषण का स्तर खतरनाक है। विनायक मिनरल्स आनंद अग्रवाल, मंगल मेटल प्रतीश गोयल, बालाजी माइंस एंड मिनरल्स अंकुर अग्रवाल और शुभ मिनरल्स प्रतीश गोयल को 35 एकड़ में नई खदान दी जा रही है।
पहले की खदानों में नहीं किया प्लांटेशन
आर्यन मिनरल्स, शुभ मिनरल्स और बालाजी माइंस एंड मिनरल्स पहले से संचालित हैं। इनको पर्यावरणीय शर्तों के मुताबिक कई काम करने थे। खदान व क्रशर की सीमा में बाउंड्रीवॉल, वृक्षारोपण, रोड निर्माण किया जाना था। तीनों ने ही प्लांटेशन नहीं किया। उल्टा पहले से जो पेड़ थे, उनको काट डाला। क्रशर से निकलने वाला डस्टयुक्त पानी भी सीधे खेतों में छोड़ा जा रहा है।
ग्राम पंचायत से लेंगे पानी के टैंकर
चारों क्रशर संचालकों को प्रतिदिन 30 किलो लीटर पानी की जरूरत होगी। क्रशर संचालकों ने कहा है कि वे ग्राम पंचायत से टैंकर लेकर इसकी पूर्ति करेंगे। अगर जरूरत हुई तो बोरवेल करेंगे। वर्तमान में इन्हीं क्रशरों में एक से ज्यादा बोरवेल हैं। भू-जल स्तर घट रहा है लेकिन ये बेहिसाब भू-जल दोहन कर रहे हैं। इस पर कार्रवाई होनी चाहिए थी लेकिन सबकुछ समझौते पर चल रहा है।
क्या कहते हैं कन्नौजे
“मैंने खनिज विभाग को जांच के लिए कहा है। डोलोमाइट खदानों की जनसुनवाई होने वाली है।”
– संजय कन्नौजे, कलेक्टर, सारंगढ़-बिलाईगढ़
क्या कहते हैं अंकुर
“डोलोमाइट क्रशरों और खनिज पट्टों को प्लांटेशन करना अनिवार्य है। भू-जल दोहन के भी नियम हैं। तय शर्तों के आधार पर जांच करेंगे।”
– अंकुर साहू, क्षेत्रीय अधिकारी


























