- धरमजयगढ़ में शासकीय भूमि के रिकॉर्ड में पटवारी की मिलीभगत से चढ़ा महिला का नाम, कलेक्टर ने मांगी थी रिपोर्ट
रायगढ़। सरकारी जमीनों को हड़पने के लिए रायगढ़ में कई तरह के हथकंडे अपनाए जाते हैं। एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसमें एक व्यक्ति ने सरकारी जमीन को दूसरे के नाम चढ़ा लिया। फिर अपने नाम पर रजिस्ट्री करवा ली। इसका खुलासा होने के बाद कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए थे। एसडीएम ने जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की है। धोखे से कूटरचना कर सरकारी जमीन को निजी बनाने के कई मामले सामने आते हैं। आवंटन भूमि को भी प्लॉटिंग कर कॉलोनी काट दी जाती है। धरमजयगढ़ तो इस खेल में सबसे आगे है। यहां सरकारी जमीन, वन भूमि को शातिर तरीके से हड़पा जा रहा है। धरमजयगढ़ के अमलीटिकरा का प्रकरण सुर्खियों में है।
प्रेमनगर अमलीटिकरा निवासी राजू कुमार यादव ने 17 जनवरी 2025 को फुलेश्वरी पिता मानिकदास निवासी अमृतपुर से पांच खसरा नंबरों की जमीन रजिस्ट्री करवाई थी। खनं 348/2 रकबा 0.1210 हे., खनं 349/2 रकबा 0.1620 हे., खनं 334 रकबा 0.2600 हे., खनं 355/2 रकबा 0.3820 हे. और 357/2 रकबा 0.3870 हे. कुल 1.312 हे. की रजिस्ट्री राजू के नाम पर हुई। सामान्य तौर पर यह एक जमीन खरीदी-बिक्री का मामला दिख रहा है, लेकिन यह जमीन तो फुलेश्वरी की थी ही नहीं। यह जमीन सरकारी थी, जिसे राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ करके उसके नाम पर कर दिया गया।
फिर राजू यादव ने अपने नाम पर पंजीयन करवा लिया। इन्हीं खसरा नंबरों के दूसरे टुकड़े अभी भी शासकीय भूमि के रूप में रिकॉर्ड में दर्ज हैं। खसरा नंबर 348/1 रकबा 1.4490 हे., खनं 349/1 रकबा 2.2880 हे., खनं 355/1 रकबा 0.3820 हे. और खनं 357/1 रकबा 0.4830 हे. सरकारी जमीनें हैं। मूल खसरे को काटकर सभी से जमीन को फुलेश्वरी के नाम पर चढ़ाया गया। इसके बाद 17 जनवरी 2025 को रजिस्ट्री करवा दी गई।
एसडीएम ने भेजी रिपोर्ट
इस मामले में कलेक्टर ने एसडीएम को जांच के आदेश दिए थे। एसडीएम ने प्रतिवेदन भेज दिया है। बताया जा रहा है कि मामले में एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है। अमलीटिकरा की पांचों खसरा नंबर की जमीन को पहले दो टुकड़ों में बांटा गया जबकि किसी को आवंटन नहीं किया गया था। पटवारी की मिलीभगत से इस काम को अंजाम दिया गया। 17 जनवरी 2025 को रजिस्ट्री के बाद तत्कालीन तहसीलदार भोजकुमार डहरिया ने नामांतरण किया था।























