रायगढ़। वन विभाग अपने जंगलों की सुरक्षा के लिए सीमेंट पोल और फेंसिंग तार या जाली खरीदता है। अलग-अलग वनमंडलों में इसकी कीमतों में थोड़ा-बहुत अंतर तो आ सकता है लेकिन दोगुना तो नहीं हो सकता। धरमजयगढ़ वनमंडल में दोगुनी से भी ज्यादा दरों पर सीमेंट पोल खरीदे गए हैं। पारदर्शी सरकार को वनमंडलों में भ्रष्टाचार को रोकने में काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। वन विभाग के काम जंगल में मोर नाचा किसने देखा की तर्ज पर ही होते हैं। कहां जंगल सुरक्षा पर कितना व्यय हुआ, वन्य प्राणियों के लिए कितने तालाब कहां बनाए गए कोई नहीं जानता। इसी तरह सामग्री क्रय में भी बहुत संदेहास्पद आंकड़े सामने आते हैं। वर्ष 2022 से जनवरी 2026 तक प्रदेश के वनमंडलों में खरीदे गए सीमेंट पोल और फेंसिंग तार या जाली की जानकारी सामने आई है। इसके हिसाब से धरमजयगढ़ वनमंडल में सबसे ज्यादा कीमत पर सीमेंट पोल क्रय किए गए हैं।
चार सालों में रायगढ़ वनमंडल में 85954 पोल 1,86,56,000 रुपए में खरीदे गए, जिसमें प्रति पोल औसत कीमत करीब 217 रुपए होती है। इसी तरह सारंगढ़-बिलाईगढ़ वनमंडल में इन चार सालों में 83056 पोल 2,52,10,000 रुपए (प्रति पोल 303 रुपए) में क्रय किए गए हैं। जांजगीर-चांपा में 78244 पोल 3,29,76,000 (प्रति पोल 421 रुपए) में, बिलासपुर में 34544 पोल 1,22,55,000 (प्रति पोल 354 रुपए) में क्रय किए गए। जबकि धरमजयगढ़ वनमंडल में इन चार सालों में 35007 पोल 1.69 करोड़ में खरीदे गए जिसमें प्रति पोल 482 रुपए का भुगतान किया गया। रायगढ़ और धरमजयगढ़ वनमंडल की तुलना करें तो कीमत में करीब ढाई गुना का अंतर है। यह बेहद गंभीर बात है कि जांजगीर-चांपा और धरमजयगढ़ वनमंडलों में सीमेंट पोल को बाकी जिलो से कहीं अधिक दरों पर खरीदा गया।
फेन्सिंग जाली की कीमतें भी अलग-अलग
जेम पोर्टल से खरीदने के लिए सरकार सभी विभागों को आदेश दे रही है। इसका उद्देश्य कम व्यय करना और एकरूपता लाना है। लेकिन वनमंडलों में निर्देश लागू ही नहीं होते। सीमेंट पोल की कीमतों में जमीन आसमान का अंतर है। हजारों किलो फेंसिंग तार भी खरीदे गए जिसमें रायगढ़ में 78 रुपए, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 72 रुपए, धरमजयगढ़ में 78 रुपए, बिलासपुर में 82 रुपए और जांजगीर-चांपा में 74 रुपए प्रति किलो की दर रही। इसमें भी अंतर लाखों रुपए में आ रहा है।























